सुरेश कश्यप को अध्यक्ष बना हाईकमान ने साधा क्षेत्रीय और जातीय संतुलन
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अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित शिमला लोकसभा सीट से सांसद सुरेश कश्यप को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बनाकर पार्टी हाईकमान ने क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम जयराम ठाकुर के करीबी को अध्यक्ष बनाकर सरकार और संगठन में भी अच्छा तालमेल बनेगा। युवा अध्यक्ष की नियुक्ति से भाजपा ने युवाओं पर भी दांव चला है। इसके अलावा भाजपा हाईकमान ने ढाई साल बाद के मिशन रिपीट को भी लक्षित किया है।
इस बेहतरीन सियासी समीकरण से भाजपा हाईकमान हिमाचल के बारे में इस मिथ्य को तोड़ना चाहता है कि यहां सरकारें रिपीट नहीं होती हैं। सुरेश कश्यप से पहले डॉ. राजीव बिंदल को भी भाजपा हाईकमान ने क्षेत्रीय संतुलन को साधते हुए अध्यक्ष बनाया था। वह भी शिमला संसदीय क्षेत्र के उसी सिरमौर जिले से संबंध रखते हैं जहां से सुरेश कश्यप हैं। कश्यप अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं तो बिंदल व्यवसायी वर्ग से थे। चुनावी प्रबंधन में अति कुशल बिंदल को दुर्भाग्य से एक विवाद में नाम आने के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा, जबकि वह विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी छोड़कर इस पद पर आए थे।
प्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या करीब 24 फीसदी है। ऐसे में कश्यप को आगे कर भाजपा ने इस जनसंख्या पर दांव चला है। हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों शिमला, कांगड़ा, हमीरपुर और मंडी में 17-17 विधानसभा हलके आते हैं। मंडी से मुख्यमंत्री के रूप में बड़ा नेतृत्व है। बिंदल से पहले छह साल से ज्यादा अवधि तक सतपाल सिंह सत्ती भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रहे। सत्ती हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से संबंध रखते हैं।
इसी क्षेत्र के सांसद अनुराग ठाकुर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के रूप में बड़े प्रतिनिधि हैं तो केंद्रीय नेतृत्व ने यहां से अध्यक्ष को दोहराना ठीक नहीं समझा। कांगड़ा से प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार पहले मंत्री थे तो वहां से मंत्री का पद खाली हुआ। कांगड़ा से ही किशन कपूर के सांसद बनने के बाद जयराम मंत्रिमंडल में एक और मंत्री पहले से ही कम हो गया था। ऐसे में कांगड़ा से दो मंत्रियों के पद खाली होने के बाद माना जा रहा था कि पार्टी अध्यक्ष कांगड़ा से भी हो सकता है। मगर अध्यक्ष के वहां से नहीं बनने के बाद अब कांगड़ा की मंत्री पद पर दावेदारी और मजबूत हो गई है। हालांकि, शिमला संसदीय क्षेत्र की दावेदारी इससे कम हुई है।
सांसद को अध्यक्ष बनाने के गुजरात, लद्दाख के अध्यक्षों की ताजपोशी से भी दे दिए थे संकेत
हिमाचल में भी कोई सांसद ही अध्यक्ष होगा, इसके संकेत हाईकमान ने 20 जुलाई को लद्दाख और गुजरात के सांसदों को अध्यक्ष बनाकर दे दिए थे। गुजरात के नए प्रदेशाध्यक्ष सीआर पाटिल और लद्दाख के नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जमयंग छेरिंग नमग्याल भी सांसद हैं।
वीरेंद्र कश्यप का टिकट काटकर लोकसभा चुनाव लड़े थे सुरेश कश्यप
सुरेश कश्यप को जब वर्ष 2019 में शिमला संसदीय सीट से भाजपा का टिकट दिया गया तो वह विधायक थे। उस समय उन्हें टिकट देने के लिए सिटिंग भाजपा सांसद वीरेंद्र कश्यप का टिकट काट दिया गया था। नम्र स्वभाव के कश्यप उस वक्त भी पार्टी में हर स्तर पर स्वीकार्य थे। उस वक्त भी उन्होंने अच्छे मतों से चुनाव जीता था।