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पालमुपर में 2300 कनाल चाय बागान की जमीन को हथियाने की साजिश
Mon, 27 Jul 2020 07:23 AM IST
अरविन्द ठाकुर
सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 27 Jul 2020 07:23 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट सौरभ वन विहार के पास एक इलाके में मिलीभगत से चाय बागान के अधीन आने वाली 2300 कनाल जमीन को थर्ड पार्टी यानी तीसरे व्यक्ति के नाम करवाने की साजिश अफसरों ने नाकाम कर दी है। जमीन अरबों रुपये की है। लैंड सीलिंग एक्ट और सरकारी नियमों को दरकिनार कर मात्र वसीयत के सहारे जमीन को हथियाने की कोशिश हो रही थी। हाईप्रोफाइल दबाव के बीच जमीन को हथियाने के लिए बड़ी चालाकी से जाल बिछाया गया था।
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फिलहाल पालमपुर तहसीलदार कोर्ट ने जमीन की वसीयत का इंतकाल यानी नाम चढ़ाने की अर्जी अपने कोर्ट में खारिज कर दी है। एसडीएम कोर्ट पालमपुर ने भी याचिकाकर्ता की जमीन का इंतकाल करने की अपील खारिज कर दी है। सूत्र बताते हैं कि मामला काफी हाईप्रोफाइल है। वसीयत नाम करवाने के लिए अंदरखाते बड़े स्तर पर साजिश हो रही थी।
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दअरसल, पालमपुर के एक निसंतान व्यक्ति ने सौरभ वन विहार के पास अपनी चाय बागान के अधीन आने वाली करीब 2300 कनाल भूमि की वसीयत परिवार के नाम न कर पालमपुर के ही किसी तीसरे व्यक्ति के नाम वर्ष 2003 में कर दी थी। चाय बागान के इस संरक्षक की वर्ष 2018 में मौत हो गई। इसकी पत्नी की भी मौत हो गई थी। चाय बागान के संरक्षक ने जिस तीसरे व्यक्ति के नाम चाय बागान की जमीन की वसीयत की थी, वह जमीन को अपने नाम करवाने के लिए तहसीलदार पालमपुर के कोर्ट में पहुंच गया। अधिकारी ने जांच में पाया कि मामला गड़बड़ है।
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यह कहता है सीलिंग एक्ट
सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग संशोधित एक्ट 1999 की धारा 10 के अनुसार चाय बागान के अधीन आने वाली जमीन की बिक्री दान, लीज, गिरवी रखने की अनुमति नहीं है। इस परिस्थिति में सरकार ही विशेष रूप से विचार कर विशेष अनुमति दे सकती है। लैंड सीलिंग एक्ट के मुताबिक चाय बागान की जमीन की वसीयत भी सरकार की अनुमति के बिना नहीं हो सकती है। वसीयत पाने वाले व्यक्ति के पास सरकार की कोई भी अनुमति नहीं थी। यानी, अफसरों को धोखे में रखकर वसीयत का इंतकाल चढ़ाने की कोशिश की जा रही थी जिसे पकड़ लिया गया।
क्या कहते हैं डीसी
डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति से मामले के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा मामला तहसीलदार पालमपुर के पास आया था लेकिन उसे खारिज कर दिया गया है। इसके अलावा उपायुक्त ने मामले पर और कुछ भी कहने से इनकार किया।
यह उठ रहे सवाल
मृत्यु से पहले व्यक्ति ने पत्नी और अपनी बहन से इतर तीसरे शख्स यानी थर्ड पार्टी के नाम अरबों रुपये की 2300 कनाल जमीन की वसीयत किस कारण की, यह बड़ा सवाल है। क्या उस दौरान वसीयत करने वाले और वसीयत पाने वाले तीसरे व्यक्ति के बीच में कोई डील तो नहीं हुई थी। क्योंकि, अरबों रुपये की जमीन आखिर कोई तीसरे व्यक्ति को दान में क्यों देगा। सूत्रों की मानें तो चाय बागान के अधीन जमीन की वसीयत पाने वाला तीसरा व्यक्ति मोहाली की एक बड़ी कंपनी से संबंधित है जो हिमाचल सहित कई राज्यों में बड़े प्रोजेक्टों के टेंडर लेती है।