भरमौर: जनसभा में वीरभद्र को याद कर भावुक हुईं कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह
कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने जनता को विश्वास दिलाया कि वह जीतीं तो पीएम मोदी से जनजातीय क्षेत्र पांगी की चैहणी सुरंग, होली-उतराला सुरंग के निर्माण का मुद्दा उठाएंगी।
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मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने शनिवार को भरमौर के चौरासी परिसर पर माथा टेकने के बाद पहली चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान दिवंगत वीरभद्र सिंह को याद कर वह भावुक हो गईं।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह के पद चिह्नों पर चलकर ही यह चुनाव लड़ा जाएगा। जनता को विश्वास दिलाया कि वह जीतीं तो पीएम मोदी से जनजातीय क्षेत्र पांगी की चैहणी सुरंग, होली-उतराला सुरंग के निर्माण का मुद्दा उठाएंगी। भरमौर के बाद उन्होंने लिल्ह में भी जनसभा को संबोधित किया।
इससे पहले पूर्व मंत्री व विधायक आशा कुमारी ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर हमला बोला। पूर्व मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी वीरभद्र सिंह द्वारा करवाए गए कार्यों को लेकर व उनकी कमी को लेकर भावुक हो गए। भरमौरी विधायक द्वारा किए जा रहे कार्यों को लेकर उन पर जमकर बरसे। कहा कि लोगों की समस्याओं को लेकर विधायक का कोई लेना-देना नहीं हैं।
प्रतिभा को क्या पता सैनिक की चुनौती: खन्ना
मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के बयान पर भाजपा ने तंज कसा है। प्रतिभा सिंह ने मंडी रैली के दौरान ब्रिगेडियर कुशाल चंद के चुनाव लड़ने पर कहा था कि चुनाव सेना का मैदान नहीं है। इस पर हिमाचल भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि तथाकथित महलों में जन्मीं और महलों में रहने वाली प्रतिभा सिंह को क्या पता कि सैनिकों की चुनौतियां क्या होती हैं।
सुविधा संपन्न जीवन जीने वालों को सब कुछ मैदान की तरह आसान लगता है। सैनिक देश के लिए अपने घर और परिवार से दूर कभी बर्फीले पहाड़ों, कभी तपते रेगिस्तान तो कभी उफनते समंदर का सामना करता करते हैं। वे मैदान में नहीं, दुश्मन की गोलियों के बीच सीमाओं पर बने बंकरों में रहकर देश की रक्षा करते हैं। खन्ना ने कहा कि सैनिकों का काम हर वक्त चुनौतियों से जूझना है। सैनिक हार-जीत की चिंता किए बिना युद्ध के हर मोर्चे पर डटा रहता है।
वह कभी भी मैदान नहीं छोड़ता। प्रतिभा सिंह बताएं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के भय से मैदान क्यों छोड़ा था, जो आज राजनीतिक अखाड़े की बात कर रही हैं। जब वह पूर्व में सांसद थीं तो जनता के बीच घूमने की मंशा क्यों नहीं रखती थीं। जब उन्हें लगता है कि सहानुभूति लाकर उनकी राह आसान हो सकती है तो चुनाव लड़ रही हैं, ऐसा संभव नहीं होगा।