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निजी स्कूलों को पूरी फीस वसूली की मंजूरी देने के खिलाफ गरजेंगे अभिभावक
Sun, 08 Nov 2020 05:08 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 08 Nov 2020 05:08 PM IST
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छात्र अभिभावक मंच
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के निजी स्कूलों को पूरी फीस वसूली की मंजूरी देने के खिलाफ सोमवार को अभिभावक प्रदर्शन करेंगे। छात्र अभिभावक मंच के बैनर तले सोमवार को उच्च शिक्षा निदेशालय का घेराव किया जाएगा। अभिभावकों ने सरकार पर कोर्ट को गुमराह करते हुए अपनी सुविधानुसार कोर्ट के फैसले की व्याख्या करने का आरोप लगाया है। मांग की है कि हाईकोर्ट मामले में संज्ञान ले और अभिभावकों को राहत दी जाए। मंच ने सरकार से मांग की है कि इस निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए।
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मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सह संयोजक बिंदु जोशी, सदस्य विवेक कश्यप, फालमा चौहान, सत्यवान पुंडीर, जियानंद शर्मा, जयचंद, राकेश रॉकी, राजेंद्र कुमार व शैलेंद्र कुमार ने निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छह लाख छात्रों के दस लाख अभिभावकों सहित कुल 16 लाख लोगों से निजी स्कूलों की पूर्ण फीस उगाही का पूर्ण बहिष्कार करने की अपील की है।
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उन्होंने कैबिनेट के निर्णय को बेहद चौंकाने वाला, छात्र व अभिभावक विरोधी बताया। कहा कि यह निर्णय आने के बाद निजी स्कूलों ने छात्रों व अभिभावकों को मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है। विजेंद्र मेहरा ने हाईकोर्ट से अपील की है कि निजी स्कूलों के पूरी फीस वसूली के मामले में कर सरकार पर कार्रवाई की जाए।
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सरकार उच्च न्यायालय के निर्णय की गलत व्याख्या कर रही है व अपनी सुविधा अनुसार हाईकोर्ट के नाम पर निजी स्कूलों को छूट दे रही है। कहा कि सरकार ने आज तक उच्च न्यायालय के 27 अप्रैल 2016 को निजी स्कूलों की लूट को रोकने के संदर्भ में दिए ऐतिहासिक निर्णय को लागू नहीं किया है। यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है।
उन्होंने हैरानी जताई कि उच्च न्यायालय के साफ शब्दों में दिए गए वर्ष 2016 के निर्णय को सरकार लागू नहीं करती है व वर्ष 2020 के निर्णय को अपनी ही सुविधा अनुसार पुनर्परिभाषित करके निजी स्कूलों को फायदा पहुंचा रही है।
उन्होंने कहा है कि सरकार की निजी स्कूलों के साथ मिलीभगत का पर्दाफाश हो चुका है। इस कारण ही सरकार ने मई में जान बूझकर अधिसूचना में अस्पष्टता दिखाई, जिससे वक्त आने पर निजी स्कूलों को इसकी आड़ में लूट की खुली इजाजत दी जा सके।