{"_id":"62d7b14542461f31db070550","slug":"himachal-mandi-news-pangna-village-soil-used-in-new-parliament-building","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिट्टी का मान: नए संसद भवन की इमारत में लगेगी मंडी के पांगना की मिट्टी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिट्टी का मान: नए संसद भवन की इमारत में लगेगी मंडी के पांगना की मिट्टी
Wed, 20 Jul 2022 01:11 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/सुंदरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी/सुंदरनगर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 20 Jul 2022 01:11 PM IST
सार
भारत सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पांच-पांच किलोग्राम मिट्टी मांगी है। यह मिट्टी उन क्षेत्रों से भेजी जा रही है, जो प्रदेश की संस्कृति और सभ्यता से संबंधित है या आजाद भारत के निर्माण में अहम भूूमिका निभाई है।
विज्ञापन
सुकेत रियासत का किला।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश की राजधानी दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बन रहे नए संसद भवन की इमारत में देवभूमि हिमाचल की मिट्टी का इस्तेमाल भी किया जाएगा। यह मिट्टी सुकेत रियासत के संस्थापक राजा वीरसेन सहित 52 चंद्रवंशी शासकों की समृद्ध विरासत रूपी कर्मस्थली पांगणा बेहड़े (स्मारक) परिसर से भिजवाई गई है। भाषा कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने मिट्टी भेजने की पुष्टि की है।
विज्ञापन
भारत सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पांच-पांच किलोग्राम मिट्टी मांगी है। यह मिट्टी उन क्षेत्रों से भेजी जा रही है, जो प्रदेश की संस्कृति और सभ्यता से संबंधित है या आजाद भारत के निर्माण में अहम भूूमिका निभाई है। सुकेत भारत में अंग्रेजी राज के समय एक रियासत थी, जिसकी राजधानी पांगणा (सुरही इलाके में) में थी। तब यह रियासत पंजाब हिल स्टेट्स का हिस्सा थी।
विज्ञापन
1958 में सुकेत के तत्कालीन राजा लक्ष्मण सेन ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ अक्सीशन पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद सुकेत भारत का हिस्सा बन गया। सुकेत और मंडी रियासत को मिलाकर मंडी जिले का गठन किया गया, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में है। इसकी स्थापना 1241 ईस्वी में राजा वीरसेन ने की थी।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) पर्यावरण के नजरिए से भी लंबे समय तक हवा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए भवन के ऊपर मिट्टी की परत चढ़ाएगा।
सुकेत सत्याग्रह ने जगाई थी रियासतों के विलय की मशाल
देश को आजादी तो 15 अगस्त, 1947 को मिली मगर कुछ रियासतों ने तत्काल भारतीय गणतंत्र में विलय नहीं किया। इन रियासतों के राजा स्वतंत्र रूप से अपनी हुकूमत चलाते रहे। 1948 में सुकेत सत्याग्रह के नाम से आंदोलन इन रियासतों के भारतीय गणतंत्र में विलय को लेकर किया गया था।
इसकी अगुवाई स्वतंत्रता सेनानियों पं. पदम देव, डॉ. वाईएस परमार आदि ने अपने हाथों में ले रखी थी। सुकेत रियासत की प्राचीन राजधानी पांगणा से यह मशाल जली थी। 8 फरवरी, 1948 को सुन्नी में प्रजामंडल के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें तय किया गया कि रियासतों के विलय को लेकर सत्याग्रह चलाया जाए, जिसमें 1958 में कामयाबी मिली थी।