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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Less Cash in Pockets Mobile Phones Become Wallets; Digital Payment Systems Reduce Reliance on Cash.

हिमाचल: जेब में नकदी कम, मोबाइल फोन बना बटुआ, डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने कम की नकदी पर निर्भरता

Sat, 09 May 2026 11:13 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 09 May 2026 11:13 AM IST
सार

। कभी जेब में छुट्टे पैसे और छोटे नोट रखना रोजमर्रा की जरूरत माना जाता था, लेकिन अब मोबाइल फोन ही नया बटुआ बनता जा रहा है। 

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Himachal: Less Cash in Pockets Mobile Phones Become Wallets; Digital Payment Systems Reduce Reliance on Cash.
नकद और डिजिटल भुगतान - फोटो : Adobestock

विस्तार

हिमाचल प्रदेश का आर्थिक व्यवहार तेजी से बदल रहा है। कभी जेब में छुट्टे पैसे और छोटे नोट रखना रोजमर्रा की जरूरत माना जाता था, लेकिन अब मोबाइल फोन ही नया बटुआ बनता जा रहा है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तेजी से बढ़ते दायरे ने नकदी पर निर्भरता कम कर दी है। यही वजह है कि प्रदेश में एटीएम से नकदी निकालने का औसत लगातार घट रहा है। एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के अनुसार हिमाचल प्रदेश में यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली ने लोगों की आदतों को तेजी से बदला है।

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छोटे-छोटे भुगतान अब सीधे मोबाइल से हो रहे
छोटे-छोटे भुगतान अब सीधे मोबाइल से हो रहे हैं।  रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में प्रति एटीएम मासिक औसत नकदी वितरण वित्त वर्ष 2023 में 1.21 करोड़ रुपये था। यह वित्त वर्ष 2024 में घटकर 1.12 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में करीब 1.03 करोड़ रुपये रह गया। बैंकिंग सेक्टर के अधिकारी इसे सिर्फ बैंकिंग आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलती आर्थिक संस्कृति का संकेत मान रहे हैं।

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100 रुपये के नोट की मांग में 0.3 फीसदी का इजाफा
एसबीआई रिसर्च की ताजा इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में मार्च 2026 तक 100 रुपये के नोटों के चलन में बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि 200 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। मार्च 2025 के मुकाबले में मार्च 2026 में प्रदेश में 100 रुपये के नोट की मांग में 0.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि प्रदेश में 500 के नोटों के मूल्य में 0.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 200 रुपये की हिस्सेदारी में 0.4 फीसदी की कमी आई है। देशभर के आंकड़ों की तुलना करें तो मध्य प्रदेश में 500 के नोटों के मूल्य में सबसे ज्यादा 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हिमाचल की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जहां जनता अभी भी 500 के नोट पर ज्यादा निर्भर है।

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 डिजिटल भुगतान को आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा: दीपक कुमार
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रभारी दीपक कुमार का कहना है कि हिमाचल में भुगतान की यह नई संस्कृति आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन सेवाओं और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बना दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं जरूर चिंता का विषय बन रही हैं। बैंक और प्रशासन लगातार लोगों को फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग एप और ओटीपी साझा न करने के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हो रहा
पहले डिजिटल भुगतान को केवल शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में भी यूपीआई तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पंचायत स्तर तक दुकानदार क्यूआर कोड लगाकर भुगतान ले रहे हैं। छोटे कारोबारी भी नकदी संभालने की झंझट से बच रहे हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों में आने वाले पर्यटक भी नकदी की बजाय मोबाइल भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। होटल, टैक्सी और रेस्तरां में यूपीआई सबसे आसान विकल्प बन चुका है। इससे कारोबारियों को भी तुरंत भुगतान मिलने की सुविधा हो रही है।

छुट्टे पैसों की परेशानी हुई कम
कुछ वर्ष पहले तक दुकानदारों और ग्राहकों के बीच छुट्टे पैसे को लेकर रोज बहस होती थी। 500 रुपये का नोट देकर 20 रुपये की खरीदारी करने पर दुकानदार परेशान हो जाते थे। अब स्थिति बदल चुकी है। ग्राहक सीधे स्कैन कर भुगतान कर रहे हैं। इससे नकदी रखने का दबाव भी कम हुआ है।

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