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लैंडस्लाइड हादसा: फिर सामने आई सरकार, प्रशासन की बड़ी चूक

Fri, 18 Aug 2017 04:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटरोपी/ पधर (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटरोपी/ पधर (मंडी) Updated Fri, 18 Aug 2017 04:27 PM IST
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himachal landslide in mandi negligence of government and administration

हिमाचल के मंडी जिले के कोटरोपी लैंडस्लाइड हादसे में प्रशासन और सरकार की फिर बड़ी चूक सामने आई है। गौर हो कि इस हादसे में 48 लोगों की मौत हुई है।

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सरकार ने प्रशासन के माध्यम से बरसात से पहले प्रदेश में जितने भी स्लाइडिंग जोन चिह्नित किए थे, उसमें कोटरोपी को शामिल नहीं किया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक इस पहाड़ पर वर्ष 1977 से  भूस्खलन हो रहा है। हर बीस साल के बाद यहां बड़ा भूस्खलन हुआ है। वर्ष 1997 में भी यहां भीषण भूस्खलन हुआ था, लेकिन उस  दौरान जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था।
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वर्ष 2017 का भूस्खलन भारी तबाही लेकर आया है। वहीं हर बरसात में इसी स्पॉट से गुम्मा तक जगह जगह ल्हासे गिरते हैं। हादसे से पहले कोटरोपी पहाड़ से लोगों के मकान खाली करना और सूचना देेने के बावजूद प्रशासनिक अमले द्वारा एहतियात न बरतना व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है।
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अगर इस स्लाइडिंग जोन को संवेदनशील पहाड़ों की फेहरिस्त में शामिल किया होता तो शायद जानमाल का नुकसान कम हो सकता था। यह क्षेत्र स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का गृह क्षेत्र है।

क्षेत्र उधर, मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि कोटरोपी त्रासदी सूबे की अब तक की सबसे बड़ी घटना है। इस भयावह घटना ने आम जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। स्लाइडिंग जोन में कोटरोपी को शामिल नहीं किया गया था।

आपदा प्रबंधन को तीन करोड़ 
जिला मंडी के कोटरोपी त्रासदी आपदा प्रबंधन को तीन करोड़ की राशि जारी की है। वीरवार को कोटरोपी त्रासदी का जायजा लेने पहुंचे फारका ने आपदा से प्रभावित परिवारों से दुख साझा किया, वहीं मलबे में शेष दबे लोगों के परिजनों से भी बात की और उन्हें ढांढस बंधाया।

उन्होंने प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन को पुख्ता प्रबंध करने के निर्देश दिए। फारका ने मौका पर आपदा प्रबंधन की प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी ली और आपदा से निपटने के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दिए। 

अभी शॉर्ट टर्म बात करो: वीसी फारका
पत्रकारों से बातचीत में मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि लांग टर्म के लिए आपदा प्रबंधन को क्या कदम उठाए जाएं इसके लिए वह प्रशासनिक अधिकारियों और भू वैज्ञानिकों के साथ बैठकर बात करेंगे।

बहरहाल शॉर्ट टर्म में यहां आम जनजीवन को सामान्य लाना एक बड़ी जिम्मेवारी है, जिस पर सूझबूझ के साथ कारगर कदम उठाए जा रहे हैं। इस  दौरान डीसी संदीप कदम भी मौजूद रहे।

पांच दिन में बहाल होगा एनएच
फारका ने कहा कि सबसे पहला काम नेशनल हाईवे मार्ग को बहाल करने का है। पुराना हाईवे कहां से है, इसका पता लगाया जा रहा है और एनएच को किस सुरक्षित स्थान से वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जाए  इस पर काम युद्ध स्तर पर जारी है।

चार पांच दिनों के भीतर एनएच के बहाल हो जाने की उन्होंने बात कही। प्रभावित गांवों की बिजली, पानी और अन्य स्थायी व्यवस्था की भी उन्होंने बात कही। 


भू वैज्ञानिक बोले- नमक की पहाड़ी पर हैं स्लाइडिंग जोन
कोटरोपी हादसे को लेकर मुख्य सचिव वीसी फारका की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भू वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है। केंद्र से आए भू वैज्ञानिकों की टीम ने बैठक में जानकारी दी कि पहाड़ी के दरकने का मुख्य कारण अधिक वर्षा होना, नमक वाली पहाड़ी पर छोटे छोटे स्लाइडिंग जोन बनना, आसपास के नालों के पानी का बहाव मुख्य कारण रहा है।

दल ने बताया कि पहाड़ी के ऊपर जगेहड़ और सराजगबागला गांव के आसपास लगभग दो सौ मीटर के दायरे में जमीन धंसी है। खराब मौसम में इससे संभावित खतरे को नकारा नहीं जा सकता। सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट चंडीगढ़ कार्यालय से एक दो दिन के भीतर सरकार को प्रेषित कर दी जाएगी।

वैज्ञानिकों ने कहा कि पहाड़ी का मेजर पोर्शन निकल चुका है। अभी तक इन पहाड़ियों पर खतरा बना हुआ है। जान माल के नुकसान को नकारा नहीं जा सकता। उधर, मुख्य सचिव ने इस दौरान उपायुक्त मंडी को एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं ताकि भूस्खलन या पहाड़ खिसकने की स्थिति में लोगों और राहगीरों को आगाह किया जा सके। 


पहाड़ से सटे प्लॉटों में निर्माण कार्य पर लगी रोक
मंडी के कोटरोपी में भूस्खलन से दर्दनाक हादसे के बाद राज्य सरकार ने पहाड़ से सटे प्लॉटों में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। यह रोक मानसून खत्म होने तक जारी रहेगी।

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने बताया कि पहाड़ों से सटे प्लॉटों की कटिंग पर फिलहाल रोक लगाई गई है। बरसात में कोई अनहोनी घटना न हो, इसके लिए यह फैसला लिया गया है। बरसात में पहाड़ खिसकने का डर रहता है। ऐसे में पहाड़ियों में कटिंग कर भवन का निर्माण खतरनाक हो सकता है।  



टीसीपी के अनुसार अगर बरसात में निर्माण से भवनों को खतरा होता है तो लोग स्वयं जिम्मेवार होंगे। हिमाचल में इस साल दो सौ से अधिक नक्शे पास हुए हैं। जाहिर है कि शहरी क्षेत्रों में इतने नए मकान बन सकते हैं।

उधर, टीसीपी के दायरे में भवनों का नक्शा मौके की रिपोर्ट के बाद ही स्वीकृत होगा। जूनियर इंजीनियर मौके का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान देखा जाएगा कि प्लॉट का एंगल क्या है। जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट प्लॉट मालिक की फाइल के साथ लगेगी।

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