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आवाजाही में साल भर सहूलियत: लिओ बाईपास से 25 किमी घटेगी चीन से सटे समदो बॉर्डर की दूरी

Fri, 10 Dec 2021 02:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग (लाहौल-स्पीति) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 10 Dec 2021 02:49 PM IST
सार

लिओ बाईपास बनने से शिमला से काजा की दूरी 25 किमी घटेगी। सफर में तीन घंटे कम लगेंगे। सड़क बनने के बाद सेना और आम लोगों को मालिंग की 10 किलोमीटर की चढ़ाई पार नहीं करना पड़ेगी।

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Himachal Lahaul spiti news: leo bypass shorter the distance near china samdo border
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन से सटे समदो बॉर्डर तक पहुंचने के लिए सेना को अब मालिंग की चढ़ाई पार नहीं करनी होगी। किन्नौर होकर लिओ बाईपास सड़क से होते हुए बिना परेशानी साल भर स्पीति घाटी दुनिया के लिए खुली रहेगी। साढ़े 11 किलोमीटर लंबे लिओ बाईपास के निर्माण पर केंद्र और राज्य सरकार करीब 37 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। लिओ बाईपास बनने से काजा और समदो बॉर्डर से शिमला के बीच करीब 25 किमी की दूरी कम होगी। अभी शिमला से काजा और समदो की दूरी करीब 505 किलोमीटर है, जो बाईपास बनने के बाद 480 किमी रह जाएगी। सफर में लगभग तीन घंटे कम लगेंगे।

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हालांकि, लिओ बाईपास का निर्माण करीब डेढ़ दशक पहले शुरू हुआ था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से सड़क मार्ग का निर्माण अधर में लटक गया। सड़क का निर्माण लोनिवि काजा डिवीजन की देखरेख में होगा। लिओ बाईपास हालांकि 10 किमी तक तैयार हो चुका है। शेष 1700 मीटर सड़क निर्माण के लिए लोनिवि जल्द निविदा बुलाने जा रहा है। लोनिवि काजा के अधिशासी अभियंता टशी ज्ञामजो ने बताया कि अब तक इस मार्ग के निर्माण में करीब 27 करोड़ खर्च हो चुके हैं। शेष 1700 मीटर सड़क निर्माण पर लगभग 10 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
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बताया कि स्पीति नदी पर पुल लांचिंग का काम अगले साल पूरा कर लिया जाएगा। टशी ज्ञामजो ने बताया कि लिओ बाईपास बनने से शिमला से काजा की दूरी 25 किमी घटेगी। सफर में तीन घंटे कम लगेंगे। सड़क बनने के बाद सेना और आम लोगों को मालिंग की 10 किलोमीटर की चढ़ाई पार नहीं करना पड़ेगी। लिओ से यह मार्ग किन्नौर के चांगो गांव के समीप मिलेगा। शुरुआती दौर में लोनिवि काजा और किन्नौर दोनों ने मिलकर बाईपास का निर्माण शुरू किया, लेकिन बाद में लोनिवि किन्नौर ने हाथ खींच लिए। 
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मालिंग में बर्फबारी से आवाजाही में होती है दिक्कत
मौजूदा समय में समदो बॉर्डर समेत स्पीति घाटी पहुंचने के लिए मालिंग होकर सड़क मार्ग बना है। मालिंग एक तरह का दर्रा है, जिसकी समुद्रतल से ऊंचाई करीब 12 हजार फीट है। सर्दियों में मालिंग में बर्फबारी के कारण इस रूट से सफर जोखिम भरा हो जाता है। लिओ बाईपास बनने से सेना के साथ स्पीति घाटी के लोगों को आवाजाही में साल भर सहूलियत मिलेगी।

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