हिमाचल कला ग्राम: एक छत के नीचे दिखेगी प्रदेश की विरासत, लोक संस्कृति की दिखेगी झलक
कांगड़ा के नगरोटा बगवां के रजियाणा में हिमाचल कला ग्राम बनाया गया है। यहां एक ही स्थान पर हिमाचली हस्तशिल्प, हथकरघा, संगीत, नृत्य और खानपान का लुत्फ लिया जा सकेगा।
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राजस्थान के जयपुर के चोखी ढाणी और दिल्ली में दिल्ली हाॅट की तर्ज पर देश-विदेश के सैलानी हिमाचल कला ग्राम में प्रदेश की कला और संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। कांगड़ा के नगरोटा बगवां के रजियाणा में हिमाचल कला ग्राम बनाया गया है। यहां एक ही स्थान पर हिमाचली हस्तशिल्प, हथकरघा, संगीत, नृत्य और खानपान का लुत्फ लिया जा सकेगा। नए साल पर प्रदेश के लोगों और सैलानियों को समर्पित होने वाले हिमाचल कला ग्राम का संचालन एचपीटीडीसी (हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम) करेगा।
हिमाचली थीम पर तैयार किए गए कला ग्राम में सैलानियों को हिमाचल की कांगड़ी, मंडयाली, बिलासपुरी और चंबियाली धाम टोर की पत्तल पर परोसी जाएगी। होटल में कमरे भी हिमाचली थीम पर तैयार किए गए हैं। परदों से लेकर फर्नीचर, यहां तक की पेंट भी हिमाचली थीम पर होगा। हिमाचल कला ग्राम में एमफी थियेटर तैयार किए गए हैं। जहां सैलानियों को प्रदेश की लोक संस्कृति से अवगत करवाया जाएगा। परंपरागत वाद्ययंत्रों पर यहां अलग-अलग जिलों के लोकगीतों और लोकनृत्य से सैलानियों का मनोरंजन किया जाएगा।
कैसे बनते हैं हस्तशिल्प, लाइव देख सकेंगे सैलानी
आर्ट एंड कल्चर विलेज में हिमाचली हस्तशिल्प और हथकरघा के लिए स्टूडियो बनाए गए हैं। चंबा रूमाल, चंबा थाल, चंबा चप्पल, पूहलें, कांगड़ा पेंटिंग, कुल्लू और किन्नौरी शॉल, टोपी और मफलर सहित अन्य उत्पादों के लिए स्टूडियो उपलब्ध करवाए जाएंगे। यहां परंपरागत खड्डी पर सैलानी खुद भी बुनाई का अनुभव ले सकेंगे।
कांगड़ा को हिमाचल की पर्यटन राजधानी बनाने के लिए हिमाचल कला ग्राम तैयार किया गया है। नगरोटा बगवां के रजियाणा गांव को प्रदेश की कला संस्कृति के केंद्र के तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। राजस्थान की चोखी ढाणी और दिल्ली हॉट की तर्ज पर यहां सैलानी हिमाचली संगीत, नृत्य और खानपान का आनंद उठा सकेंगे।-रघुवीर सिंह बाली, चेयरमैन, पर्यटन विकास निगम