शिक्षकों के लिए मुसीबत बनी ये शर्त, आप भी दें सुझाव
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षकों को एक साल में कम से कम 220 दिन पढ़ाना अनिवार्य है। पर हैरत की बात है कि कोई भी शिक्षक अपने टीचिंग डे पूरे नहीं कर पा रहा। साल भर में 365 दिन होते हैं, इनमें 52 दिन स्कूल की छुट्टियों में, 50 संडे, 25 जीएच, 12 कैजुअल, 20 दिन यूनियन के लीडरों व सदस्यों के लिए, 20 अर्न लीव, 15 दिन ट्रेनिंग, आरएल, एलएच सहित जोड़कर 208 दिन छुट्टियों में ही बीत जाते हैं।
इस पर यदि चुनाव ड्यूटी के 30 दिन जोड़ दिए जाएं तो मात्र 178 दिन ही शिक्षकों को पढ़ाने के लिए बचते हैं। ऐसे में 178 दिन में 220 दिन पूरे करना किसी भी शिक्षक के लिए संभव नहीं है। टीचर यूनियनों के लीडर के लिए दी जाने वाले 20 दिन के अवकाश को निकाल भी दिया जाए तो 198 दिन बनते हैं, तब भी टीचिंग डे के 220 दिन पूरे नहीं होते हैं।
पॉलिसी में बदलाव की जरूरत
अब इन 198 दिन में शिक्षकों को जनगणना, मिड डे मील, टेबल मार्किंग, सेमीनार, एग्जाम ड्यूटियों के अलावा कई और गैर शैक्षणिक कार्य शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि शिक्षकों से कम से कम गैर शैक्षणिक कार्य करवाएं जाएं जबकि हकीकत कुछ और ही है। हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के प्रवक्ता डॉ. मामराज पुंडीर ने कहा कि शिक्षक टीचिंग डे पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
शिक्षकों को जब पढ़ाने का मौका ही नहीं मिलेगा तो डे कैसे पूरे होंगे। मिड डे मील, सेमीनार, इलेक्शन, मतगणना, दवाइयां बांटने के काम के अलावा दर्जनों काम दिए गए हैं। ऐसे में टीचिंग डे कैसे पूरे हो सकते हैं। सरकार को पॉलिसी में बदलाव करने पर गंभीरता से सोचना होगा। इससे डे भी बढ़ेंगे और स्कूल का रिजल्ट भी बेहतर होगा।
पाठकों ने दिए ये सुझाव
ग्रेडिंग सिस्टम समाप्त कर पांचवीं और आठवीं की परीक्षा फिर से बोर्ड द्वारा करवाई जाए। नेताओं, अध्यापकों, पंचायत प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य हो। प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की गैर शैक्षणिक ड्यूटियां न लगे। क्लास और स्कूल के रिजल्ट के आधार पर मिले शिक्षकों को प्रमोशन। ऑफिसों में बैठे अधिकारियों की ड्यूटियां फिक्स कर हर तीन महीने में निदेशक को और निदेशक सरकार को दें रिपोर्ट। सरकारी और प्राइवेट सभी स्कूलों में शिक्षा का हो एकीकरण। शिक्षकों की छुट्टियों पर लगे लगाम।
उच्च शिक्षा प्राप्त और विषय विशेषज्ञ हों पांचवीं तक के शिक्षक। शिक्षकों की ट्रेनिंग का आज तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला, ऐसे में ट्रेनिंग करवाकर समय और रुपयों को बर्बादी न हो। शास्त्री शिक्षकों के लिए भी बीएड अनिवार्य की जाए। आठवीं तक कोई भी प्राइवेट स्कूल नहीं होना चाहिए। सरकारी स्कूलों का स्तर इतना बढ़ाया जाए कि शिक्षा में कोई अंतर ही न रहे।
इस नंबर पर कॉल कर आप भी दें सुझाव
अमर उजाला को उक्त सुझाव आनी से सचिन गुप्ता, चंबा से निर्मल, कोटखाई के प्रकाश औस्टा, बिलासपुर से राकेश ठाकुर, रोहड़ू से विनय कुमार और नरेंद्र चौहान, शिमला से घनश्याम सिंह और उषा चौहान, सोलन से रामकु मार नेगी, किन्नौर से चंद्र मोहन नेगी, बिलासपुर से पद्म कुमार सहित कई पाठकों ने अपने सुझाव दिए। शिक्षा के सच को लेकर कोई भी जागरूक पाठक 97360-10280 और 94181-10002 पर सुझाव दे सकते हैं।
उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेशक शशि भूषण सेखरी ने कहा कि प्रारंभिक और उच्चतर शिक्षा विभाग शिक्षकों के टीचिंग डे बढ़ाने पर मंथन कर रहे हैं। टीचिंग डे बढ़ेंगे तो शिक्षा का स्तर भी और बढ़ेगा। सरकार भी शिक्षा के स्तर को बढ़ाने को लेकर गंभीर हैं और इस पर कार्य भी हो रहे हैं।