हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- निजी होटलों में 500 एमएल पानी की बोतलों पर प्रतिबंध नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में 500 मिलीलीटर तक की पानी की पीईटी प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध केवल सरकारी कार्यक्रमों और सरकारी होटलों तक ही सीमित है, निजी आयोजनों पर नहीं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में 500 मिलीलीटर तक की पानी की पीईटी प्लास्टिक की बोतलों पर प्रतिबंध केवल सरकारी कार्यक्रमों और सरकारी होटलों तक ही सीमित है, निजी आयोजनों पर नहीं। अदालत ने कहा कि निजी होटलों में आम जनता या गैर सरकारी कार्यक्रमों के लिए इन बोतलों के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने यह स्पष्टीकरण मैसर्स साई मेट्रो सेल्स की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि सरकार के 29 मार्च 2025 की अधिसूचना के बाद निजी होटलों में भी 500 मिलीलीटर तक की पानी की बोतलों की बिक्री पर रोक लगाई जा रही है, जो गलत है। खंडपीठ ने अधिसूचना का अध्ययन करने के बाद साफ किया कि यह प्रतिबंध केवल सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और अन्य राज्य संगठनों की इंडोर आधिकारिक बैठकों, सम्मेलनों, कार्यक्रमों और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटलों पर लागू होता है। यदि कोई सरकारी विभाग किसी निजी होटल में बैठक या कॉन्फ्रेंस आयोजित करता है तो वहां 500 मिलीलीटर तक की बोतलों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
अगर निजी होटल में कोई शादी, पार्टी या गैर सरकारी कार्यक्रम हो रहा है तो वहां इन बोतलों के इस्तेमाल पर कोई पाबंदी नहीं है। सरकार ने कोर्ट की इस बात से शुरुआती सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है कि क्या इस अधिसूचना के बाद कोई अन्य अनुपूरक आदेश तो जारी नहीं किया गया है। अदालत ने महाधिवक्ता को इस संबंध में उचित निर्देश और जानकारी जुटाने को कहा है। अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।
गारंटर के वेतन 40,000 काटने के बैंक के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
प्रदेश हाईकोर्ट ने लोन रिकवरी से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब बैंक के किसी आदेश के खिलाफ अपील पहले से ही उच्च अधिकारी के पास लंबित है, तो इस दौरान गारंटर के वेतन से जबरन पैसे काटना या सख्त कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने पुनीत नेगी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जब मामला पहले से ही अपील में विचाराधीन है, तो बैंक अधिकारियों को जल्दबाजी में सैलरी काटने जैसे कड़े कदम उठाने के बजाय फैसले का इंतजार करना चाहिए था।हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त रजिस्ट्रार (मॉनिटरिंग), सहकारी समितियां, हिमाचल प्रदेश को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता की इस अपील पर दो महीने के भीतर फैसला सुनाएं।
अदालत ने राहत देते हुए आदेश दिया है कि जब तक अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक बैंक या रिकवरी अधिकारी याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी जबरिया या दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेंगे। याचिकाकर्ता पुनीत नेगी ने बैंक से पर्सनल लोन लेने वाले एक व्यक्ति (मुख्य उधारकर्ता) के लिए गारंटर के रूप में साइन किए थे। लोन न चुकाने पर बैंक ने गारंटर यानी पुनीत नेगी की सैलरी अटैच (कुर्क) करने का आदेश दे दिया।बैंक के इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने पहले मध्यस्थता याचिका दी जो खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए अतिरिक्त रजिस्ट्रार (मॉनिटरिंग), सहकारी समितियां के पास आधिकारिक अपील दायर की, जो अभी भी चल रही है। अपील लंबित होने के बावजूद बैंक के रिकवरी कलेक्टर ने 13 अक्तूबर 2026 को एक संशोधित आदेश जारी कर दिया, जिसमें पुनीत नेगी के वेतन से हर महीने 40,000 काटने का आदेश दिया गया। इसी के खिलाफ वे हाईकोर्ट पहुंचे थे।