फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal High Court reserves decision in Vimal Negi death case

Himachal: विमल नेगी मौत मामले में डीजीपी ने उठाए एसआईटी और एसपी की भूमिका पर सवाल, जानें पूरा मामला

Thu, 22 May 2025 09:57 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 22 May 2025 09:57 AM IST
सार

 विमल नेगी की मौत मामले में डीजीपी की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में शिमला पुलिस की एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। 

विज्ञापन
Himachal High Court reserves decision in Vimal Negi death case
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (एचपीपीसीएल) के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत मामले में डीजीपी की ओर से हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में शिमला पुलिस की एसआईटी की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए हैं। डीजीपी अतुल वर्मा ने रिपोर्ट में कहा है कि इस मामले में अभी तक की जांच में कई सवाल हैं। दो वर्ष से ज्यादा समय से तैनात एसपी शिमला की भूमिका पर भी रिपोर्ट में प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा है कि एसआईटी मामले को आत्महत्या की ओर ले जा रही है। ऊना के पेखूबेला प्रोजेक्ट पर पेन ड्राइव से कम दस्तावेज मिले हुए हैं। एक पीपीटी है, केवल विशेषज्ञ और परियोजना से जुड़े लोग ही इसकी व्याख्या कर सकते हैं। हाईकोर्ट में बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान ये बातें सामने आई हैं।

विज्ञापन

 

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि डीजीपी और एसपी के आपसी टकराव की वजह से मामले में न्याय मिलने में देरी हो रही है। कोर्ट ने कहा कि न्याय ही होना नहीं चाहिए, बल्कि व्यावहारिकता में होते हुए दिखना भी चाहिए। कोर्ट ने डीजीपी, एसपी शिमला और एसीएस ओंकार शर्मा की जांच रिपोर्ट पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की जांच सीबीआई को देने पर फैसला सुरक्षित रखा है। एक दो दिन के भीतर निर्णय आ सकता है। महाधिवक्ता ने अदालत में अपील की कि मामले में सरकार को कुछ समय दिया जाए, जिससे सच्चाई सबके सामने आ सके और परिजनों को न्याय मिले। उन्होंने बताया कि सरकार पर भरोसा रखें, क्योंकि एसआईटी मामले में सही और गहनता से जांच कर रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की ओर से जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है, उसे अंतिम न माना जाए, क्योंकि यह जांच केवल एचपीपीसीएल के बड़े अधिकारियों पर लगाए आरोपों पर आधारित पर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

मामला सीबीआई को न सौंपा जाए, कमजोर होगा पुलिस का हौसला : एसपी
एसपी शिमला संजीव गांधी व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि एसआईटी ईमानदारी और निष्पक्ष तरीके से सभी पहलुओं पर बारीकी से जांच कर रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि विमल नेगी की मौत बिलासपुर में हुई थी, वहीं पर पोस्टमार्टम किया गया। यह उनके क्षेत्राधिकार से बाहर था। इसकी वजह से शिमला पुलिस मामले में पहले दखल नहीं कर पाई। मौत के बाद न्यू शिमला थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई। उसके बाद एसआईटी गठित की गई। एसआईटी ने पहले जांच कर रही पुलिस टीम के एक सदस्य से पैन ड्राइव को बरामद किया है उसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया। उन्होंने कोर्ट से पुलिस जांच पर विश्वास बरकरार रखने की गुहार लगाई और कहा कि मामला सीबीआई को न सौंपा जाए। इससे पुलिस का हौसला कमजोर होगा।

विज्ञापन

तीनों रिपोर्टें नेगी की मौत के कारणों पर केंद्रित : महाधिवक्ता
महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की ओर से जो रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई है, वह विमल नेगी के साथ बड़े अधिकारियों की ओर से गलत काम करने के लिए दवाब, देर रात काम कराने और प्रताड़ित करने से संबंधित है। यह नेगी की मौत किन कारणों से हुई है और क्यों हुई है, इस पर केंद्रित है। डीजीपी की ओर से जो एसआईटी गठित की गई थी, वह विमल नेगी के गुमशुदा होने के बाद बनाई गई है। दूसरी रिपोर्ट एसपी शिमला की है, जिसमें मौत के कारणों की जांच की जा रही है। तीसरी रिपोर्ट एसीएस की है, जो बड़े अधिकारियों पर लगे प्रताड़ना आरोपों पर आधारित है। तीनों रिपोर्टें नेगी की मृत्यु के कारणों को उजागर करने पर आधारित हैं।

देसराज पर केस दर्ज होने पर भी पुलिस खोज नहीं पाई, मामला सीबीआई को दें : परिजन
परिजनों की ओर से कहा गया कि मामले को सीबीआई को सौंपा जाए। शुरू से ही मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। देसराज पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस उसे खोज नहीं पाई है। वरिष्ठ अधिवक्ता आरके बावा ने कहा कि सरकार की लचीली कार्यप्रणाली की वजह से उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल सरकार की ओर से जमानत के विरोध पर अपना पक्ष नहीं रखा सकी। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपा दिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed