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हिमाचल: अवमानना मामले में एचपीयू को हाईकोर्ट की फटकार, रजिस्ट्रार को पेश होने के आदेश

Sat, 02 Aug 2025 12:51 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 02 Aug 2025 12:51 PM IST
सार

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पिछले आदेशों की अनुपालना अभी तक नहीं की गई है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय को बरकरार रखा है।

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Himachal: High Court reprimands HPU in contempt case, orders Registrar to appear
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) पर कोर्ट के आदेशों की अवमानना पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पिछले आदेशों की अनुपालना अभी तक नहीं की गई है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस निर्णय को बरकरार रखा है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की अदालत ने अगली सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार या संबंधित अधिकारी को कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि 30 जुलाई के कार्यालय आदेश के तहत फैसले की अनुपालना कर दी गई है, लेकिन याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता की ओर से इसका विरोध किया गया।

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उन्होंने कहा कि फैसले का अनुपालन अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने अदालत को बताया कि कोर्ट ने 7 सितंबर 2021 के फैसले में निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ताओं की नियमितीकरण से पहले की सेवाओं को न केवल वरिष्ठता के लिए, बल्कि अन्य सेवा लाभों के लिए भी जीना जाए। यह काम 6 सप्ताह के भीतर किया जाना था और ऐसा न करने पर 6 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश किए गए तथ्यों को स्वीकार करते हुए कहा कि 30 जुलाई 2025 के कार्यालय आदेश में याचिकाकर्ताओं को देय भुगतान का कोई जिक्र नहीं है। प्रथम दृष्ट ऐसा लगता है कि प्रतिवादियों ने फैसले का उल्लंघन किया है।

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जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने लगाया 10 हजार रुपये का जुर्माना
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल न करने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि यह जुर्माना उन अधिकारियों के वेतन से वसूल किया जाए, जो जवाब दाखिल करने में देरी के लिए जिम्मेदार हैं और जुर्माना राशि याचिकाकर्ता को दी जाए। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। अदालत ने प्रतिवादियों के इस लापरवाह और उदासीन रवैये को देखते हुए एक अंतिम अवसर दिया, जिससे दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल कर सके। न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादियों को बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद भी कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है। 28 मार्च 2024 को कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह का समय दिया था। इसके बाद जवाब दायर करने के लिए कई बार समय बढ़ाया गया, लेकिन नोटिस जारी होने के 1 साल और 5 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई जवाब दायर नहीं किया गया। 

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