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हिमाचल: तीन साल का अनुबंध पूरा कर चुके डॉक्टरों को तुरंत नियमित करे सरकार, हाईकोर्ट ने दिए आदेश

Fri, 23 Jul 2021 07:19 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 23 Jul 2021 07:19 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं को उन्हीं मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ रेजिडेंट, ट्यूटर विशेषज्ञ के रूप में सेवा जारी रखने की अनुमति दें, जहां वे नियुक्त हुए थे।

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himachal high court ordered govt to regularize doctors who have completed three years contract
हाईकोर्ट हिमाचल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के चार मेडिकल कालेजों में तीन साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले वरिष्ठ रेजिडेंट और ट्यूटर डॉक्टरों को तुरंत नियमित करने के आदेश जारी किए हैं। न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने डॉक्टर रेजिडेंट पॉलिसी के क्लॉज 7.4 को मनमाना और अन्यायपूर्ण भी घोषित कर रद्द कर दिया। सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं को उन्हीं मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ रेजिडेंट, ट्यूटर विशेषज्ञ के रूप में सेवा जारी रखने की अनुमति दें, जहां वे नियुक्त हुए थे।

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याचिकाओं में दिए तथ्यों के अनुसार वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन, लाल बहादुर शास्त्री गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज मंडी, मेडिकल कॉलेज चंबा और डॉ. राधा कृष्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को खोलने का फैसला किया। इन कॉलेजों के लिए विज्ञापन के माध्यम से विभिन्न विशिष्टताओं में रेजिडेंट डॉक्टरों के चयन के लिए उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए थे। शुरू में ये नियुक्तियां केवल छह माह के लिए की गई थी।
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विज्ञापन में यह विशेष रूप से निर्धारित किया था कि वरिष्ठ रेजिडेंसी के कार्यकाल को प्रदर्शन के अनुसार तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है। सभी याचिकाकर्ताओं ने आवेदन किया और साक्षात्कार में भाग लिया और उन्हें अपने संबंधित क्षेत्रों में सफल घोषित किया गया। 10 अप्रैल, 2017 को जारी पत्र द्वारा सरकार ने याचिकाकर्ताओं को उनकी योग्यता के अनुसार विभिन्न विशिष्टताओं में ट्यूटर के रूप में नियुक्त करने की स्वीकृति दी।
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हालांकि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति शुरू में छह महीने के लिए थी, लेकिन बाद में साल दर साल इसका नवीनीकरण होता रहा। सरकार की ओर से तैयार की गई नियमितीकरण नीति के अनुसार यदि कोई अनुबंध पर नियुक्त व्यक्ति, जिसने तीन साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, वरिष्ठता के आधार पर उसे नियमित किया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने भी अपने लिए इस नियमितीकरण नीति का लाभ देने की मांग की थी।

राज्य सरकार का तर्क था कि विचाराधीन पद से जुड़ी प्रकृति और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण का लाभ याचिकाकर्ताओं को नहीं दिया जा सकता। राज्य सरकार ने तर्क  दिया कि सरकार द्वारा समय-समय पर बनाई गई नियमितीकरण नीति चिकित्सा शिक्षा विभाग पर लागू नहीं होती है। सरकार की इस दलील को न्यायालय ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा तमाम स्वास्थ्य सेवाओं का ब्योरा

प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश में उपलब्ध तमाम स्वास्थ्य सेवाओं का ब्योरा कोर्ट के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं। इसमें सभी स्वास्थ्य केंद्रों और बिस्तरों की संख्या, एंबुलेंसों सहित मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों और समान प्रकृति के मामलों के संबंध में उपलब्ध सुविधाओं का रिकॉर्ड शामिल है। बाल रोगियों के लिए अलग से उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का ब्योरा भी मांगा है। कोरोना का प्रसार रोकने के आग्रह को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने यह आदेश दिए हैं। अब मामले पर सुनवाई 28 जुलाई को होगी। 

संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ के समक्ष हो रही है। खंडपीठ ने न्यायालय की ओर से गठित जिला निगरानी समितियों की ओर से दायर रिपोर्टों पर विचार किया। इनमें जिला स्तर पर कोरोना से निपटने के लिए तरह-तरह के सुझाव दिए गए हैं। कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता बीसी नेगी और अधिवक्ता वंदना मिश्रा ने सुझाव न्यायालय के समक्ष रखे। वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय वैद्य ने कहा कि सरकार कोविड -19 का प्रसार रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

उन्होंने सरकार की ओर से उठाए कदमों को कोर्ट के ध्यान में लाया। यह भी आश्वासन दिया कि इस संबंध में सरकार की ओर से और भी कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए कि वह कोविड से संबंधित सभी गतिविधियां जिनमें लगवाए गए टीकों की संख्या, लगवाए जाने वाले टीकों की संख्या, कोविड से मौतों की संख्या आदि का विवरण राज्य सरकार की संबंधित वेबसाइट पर अपलोड करना जारी रखें। भारत के सहायक सॉलिसिटर जनरल बल राम शर्मा ने भी न्यायालय के ध्यान में लाया कि भारत सरकार को कोविड -19 से निपटने के लिए 240 करोड़ के अनुदान के लिए एक प्रस्ताव भेजा गया है। 

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