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फिर न हो पीलिया, सुनिश्चित करे सरकार: हाईकोर्ट

Fri, 11 Mar 2016 08:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 11 Mar 2016 08:46 AM IST
सार

  • शिमला में फैले पीलिया को लेकर हाईकोर्ट के सख्त आदेश
  • कहा, शहर में परिवार का हर तीसरा सदस्य पीलिया से ग्रस्त
  • पानी की गुणवत्ता जांच को प्रयोगशाला स्थापित करे सरकार 
  • एमसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर कार्रवाई न करने पर जताया खेद 

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himachal high court judgement over jaundice case
हाईकोर्ट ने सरकार के बड़े अधिकारियों पर कोई भी कार्रवाई न होने पर खेद जताया है। - फोटो : डेमो पिक

विस्तार

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में फैले पीलिया मामले पर प्रदेश सरकार को कड़े आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार को ये आदेश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश में पीलिया दोबारा नहीं हो। अगर फिर से होता है तो इसके लिए मुख्य सचिव, आईपीएच विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, सचिव, सभी अधीक्षक अभियंता, नगर निगमों के आयुक्त, नगर परिषदों के कार्यकारी अधिकारी और नगर पंचायतें जिम्मेदार मानी जाएंगी। 

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हाईकोर्ट ने सरकार के बड़े अधिकारियों पर कोई भी कार्रवाई न होने पर खेद जताया है। नगर निगम शिमला और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड पर भी कोई कार्रवाई न होने पर खेद जताया है। कोर्ट ने कहा है कि स्वच्छ पानी नागरिकों का मौलिक अधिकार है और यह हर सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि वह स्वच्छ पानी मुहैया करवाए।

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सरकार का दायित्व, हर रोगी का हो मुफ्त इलाज

himachal high court judgement over jaundice case
हाईकोर्ट - फोटो : डेमो पिक

न्यायाधीश राजीव शर्मा ने स्पष्ट किया कि शिमला शहर में परिवार का हर तीसरा सदस्य पीलिया रोग से ग्रस्त है। राज्य सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह हर रोगी का मुफ्त इलाज मुहैया करवाए। उच्च न्यायालय ने कहा कि पीलिया रोगी को अपने खून की आवश्यक जांच दूसरे राज्यों से करवानी पड़ रही है।

इसकी रिपोर्ट आने में काफी समय लग जाता है। इस कारण राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि तीन माह के भीतर सभी टेस्ट की जांच प्रदेश में ही संभव हो। इसके अलावा प्रदेश में पानी की गुणवत्ता जानने के लिए भी कोई प्रयोगशाला नहीं है तो इस बाबत प्रयोगशाला जल्द स्थापित की जाए। 

न्यायालय ने आदेश दिए कि पीलिया प्रकरण के आरोपियों को पुराने दायित्व से जुड़े पद पर न लगाया जाए, जब तक ये अधिकारी दोषमुक्त नहीं हो जाते। इन्हें सुपरवाइजरी पद पर न लगाया जाए। राज्य सरकार की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश में सभी ट्रीटमेंट

प्लांट आईपीएच की ओर से ही चलाए जाएं, जिससे पानी साफ मुहैया हो सके। हर 48 घंटे में पानी की गुणवत्ता बाबत परीक्षण किया जाए। राज्य सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पानी मुहैया करवाए। 

कनिष्ठ अभियंता को जमानत- कोर्ट ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता रूप लाल गौतम को सशर्त जमानत दी है, जिसे छह जनवरी को दायर एफआईआर में गिरफ्तार किया गया था।

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