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धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने की अधिसूचना पर न हो अमल: हाईकोर्ट

Sat, 05 Jan 2019 01:18 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 05 Jan 2019 01:18 PM IST
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himachal high court judgement over dharamshala second capital of himachal

प्रदेश हाईकोर्ट ने जयराम सरकार को आदेश दिए हैं कि वह धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने वाले निर्णय पर जनहित को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार करे। कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश सरकार इस मामले में कोई फैसला नहीं ले लेती, तब तक धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने वाली अधिसूचना पर अमल न किया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने परेश शर्मा की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किए। 

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हिमाचल की वीरभद्र सरकार ने 3 मार्च, 2017 को जारी अधिसूचना के तहत धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि संविधान के अनुच्छेद 154ए के तहत प्रदेश सरकार में शक्तियां निहित की गई हैं, जिसके तहत वह इस तरह की अधिसूचना जारी कर सकती है, लेेकिन इस अनुच्छेद के तहत लिए निर्णय को उपयुक्त अथॉरिटी की ओर से रिव्यू, रिकॉल अथवा उस पर पुनर्विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस मामले में सरकार ने कोई अन्य उपयुक्त कदम नहीं उठाया है। ऐसे में सरकार दोबारा इस अधिसूचना पर पुनर्विचार करने के लिए स्वतंत्र है।
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कांग्रेस के फैसले का भाजपा ने किया था विरोध
मार्च 2017 में जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी का दर्जा दिया था तो विपक्षी दल भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया था। तत्कालीन विपक्ष के नेता प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने के फैसले को छलावा बताया था। शिमला से विधायक सुरेश भारद्वाज ने इस फैसले को वीरभद्र सिंह पर सुधीर शर्मा के वशीकरण का परिणाम बताया था। अब सत्ता परिवर्तन होने पर जयराम सरकार इसको लेकर क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
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18 जनवरी 2017 को वीरभद्र सिंह ने की घोषणा
तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 18 जनवरी, 2017 को सरकार के शीतकालीन प्रवास के दौरान धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा की थी। दो मार्च 2017 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर मुहर लगाई थी। चुनावी साल को देखते हुए वीरभद्र सरकार ने धर्मशाला को दूसरी राजधानी बनाने का बड़ा दांव खेला था।

31 मार्च तक बन जाएगा सोलन-परवाणु फोरलेन 
सोलन से परवाणू तक फोरलेन का काम 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। कोर्ट को यह जानकारी राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और इस कार्य में लगी कंपनी की ओर से दी गई। यह भी बताया गया कि जाबली और कुमारहट्टी बाईपास पर फ्लाई ओवर के काम के लिए कुछ समय लगेगा। सोलन के रबून गांव और कुमारहट्टी में दुकानों और ढांचों को कब्जे में लेने का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

बिजली बोर्ड की ओर से भी न्यायालय के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश जारी किए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने एसडीओ सिविल को आदेश दिए कि वे इन संपत्तियों को कब्जे में लेने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंपे। इसके अलावा उन्हें यह भी आदेश जारी किए गए हैं कि वे कुमारहट्टी और बड़ा में दुकानों सहित अन्य ढांचों के मुआवजे के अवार्ड दो सप्ताह के भीतर पारित करें। यह सुनिश्चित करें कि अधिकृत की गई भूमि को दो सप्ताह के भीतर कब्जे में लेने के बाद इसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी को अगले सप्ताह दो सप्ताह के भीतर सौंपा जाए।

एसडीओ सिविल को इस बाबत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश जारी किए गए हैं। एसडीओ सिविल को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जहां पर बिजली के टावर शिफ्ट किए जाने हैं, उस भूमि को संबंधित एजेंसी को सौंप दिया जाए।  विद्युत बोर्ड के प्रबंधक निदेशक को आदेश जारी किए गए हैं कि वह बिजली के खंभों को हटाने और दूसरी जगह पुन: स्थापित करने के लिए इस प्रोजेक्ट कार्य में सहयोग करें। 


न्यायालय ने पाया कि नीचे स्थापित ढांचों के लिए मुआवजा देने के लिए अवार्ड पारित नहीं किया गया है। इस कारण एसडीओ सिविल सोलन को आदेश जारी किए हैं कि वे दो सप्ताह के भीतर नीचे स्थापित ढांचों के लिए मुआवजे की राशि का हस्तांतरण करें। अगर इसके अलावा कोई और भी मुआवजा दिया जाना शेष है तो उसे अदा करने के पश्चात इस बाबत स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष दाखिल करने के आदेश जारी किए गए हैं।

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