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बीबीएन में कोई बाधा उत्पन न करें ट्रक यूनियनें: हाईकोर्ट

Wed, 25 Nov 2020 10:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 25 Nov 2020 10:32 PM IST
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Himachal High Court Judgement over baddi barotiwala nalagarh Truck unions
सांकेतिक तस्वीर

हाईकोर्ट ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए कि कोई भी निजी ट्रक ऑपरेटर यूनियनें बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ क्षेत्र में यातायात गतिविधियों में बाधा उत्पन्न न करें। यह भी स्पष्ट किया है कि बीबीएन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन को अपने उत्पाद ले जाने के लिए यातायात के इंतजाम करने की स्वतंत्रता होगी और कोई उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकेगा। 

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न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने बीबीएन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका की सुनवाई पर यह आदेश पारित किए। गुंडा टैक्स वसूली न रोक पाने के लिए कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार अदालत के आदेशों पर अमल नहीं करना चाहती।
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औद्योगिक क्षेत्र में कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। संबंधित अधिकारियों को गुंडा टैक्स वसूली रोकने के आदेश जारी किए हैं। उन पर अमल नहीं हो रहा है। मामले पर अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।
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ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी दूर करने को क्या कदम उठाए: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि कोविड-19 सेंटर में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी दूर करने को क्या कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट ने यह जानकारी शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करने को कहा है। उच्च न्यायालय ने कोरोना संक्रमण रोकने को उठाए कदमों, अतिरिक्त बिस्तरों और अन्य सुविधाओं के बारे में न्यायालय को अवगत करवाने के आदेश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी व न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने यह आदेश एक दैनिक समाचार पत्र में 10 नवंबर 2020 को छपी खबर पर संज्ञान लेने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किए। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश के नागरिकों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाना सरकार का दायित्व है।


न्यायालय को बताया गया कि इस बीमारी का प्रकोप रोकने को सरकार ने अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में मशीनें स्थापित नहीं की हैं। जिस भी व्यक्ति को बीमारी का अंदेशा होता है, अगर उसे अस्पताल में अपना टेस्ट करवाने जाना पड़ता है तो उसे 3 से 5 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। अस्पतालों में बैठने के लिए भी उपयुक्त स्थान नहीं है। मामले पर सुनवाई 27 नवंबर को होगी।

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