फंसे कांग्रेस नेता जयराम रमेश, हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस
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प्रदेश उच्च न्यायालय ने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश को नोटिस जारी किया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल द्वारा मानहानि के आरोप को लेकर दायर सिविल सूट मामले की सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया। मामले पर आगामी सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
सिविल सूट में दिए तथ्यों के अनुसार प्रतिवादी ने दो अगस्त को प्रेस कांफ्रेंस कर धूमल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। तीन अगस्त को देश के समाचार पत्रों में उनके खिलाफ समाचार प्रकाशित हुए थे। प्रार्थी प्रेमकुमार धूमल ने आरोप लगाया कि घटिया राजनीति के चलते उनको बदनाम करने के इरादे से उनके खिलाफ झूठे व आधारहीन आरोप लगाए गए।
आरोपों की भरपाई पर डाला है एक करोड़ रुपये का दावा
प्रतिवादी ने उनकी राजनीतिक व सामाजिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। आरोप लगाया गया कि समाचार पत्रों में छपी खबर के कारण उनके सामाजिक व राजनैतिक जीवन को काफी आघात पहुंचा है।
जिसे किसी भी तरीके से पूरा नहीं किया जा सकता। प्रेमकुमार धूमल ने इसकी भरपाई के लिए प्रतिवादी जयराम रमेश के खिलाफ एक करोड़ रुपये का दावा डाला है।
पुल बनाने में देरी पर हाईकोर्ट का केंद्र, राज्य सरकार को नोटिस
हिमाचल हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के बबखाल में निर्माणाधीन पुल के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। 21 करोड़ रुपये की राशि इस पुल के निर्माण कार्य पर खर्च की जा चुकी है लेकिन अभी तक यह पुल तैयार नहीं हो पाया है। जनहित में दायर की गई याचिका की सुनवाई के बाद न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रतिवादियों को 3 नवंबर तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है।
भाखड़ा बांध बनने से गोविंद सागर झील बन गई, इस कारण बिलासपुर जिला दो भागो में बंट गया। 60 किलोमीटर के दायरे में यह झील फैली हुई है। पुल के निर्माण होने से झील के किनारे बसे लोगों को लाभ होना था। वर्ष 2005 में इस पुल के निर्माण का कार्य मैसर्ज गेमन इंडिया लिमिटेड को दिया गया और इसका अनुमानित खर्च 21 करोड़ रुपये था।
2008 तक पूरा किया जाना था कार्य
ठेके की शर्त के अनुसार यह निर्माण कार्य वर्ष 2008 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित था। अदालत के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य रखे गए हैं कि अनुमानित राशि के बराबर धनराशि निर्माण कार्य पर खर्च करने के बावजूद भी लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिला है। याचिका में दलील दी गई है कि यदि किसी कारणवश प्रस्तावित स्थल पर पुल का निर्माण कार्य संभव न हो तो उस स्थिति में इसे दूसरी जगह पर शीघ्र बनाया जाए।
प्रार्थी की ओर से अदालत के समक्ष यह भी सुझाव दिया गया है कि यदि प्रस्तावित स्थल पर भारी वाहनों के लिए यह पुल तकनीकी कारणों से सही न हो तो इसे कम से कम छोटी गाड़ियों या पैदल आवाजाही के लिए ही शुरू किया जाए। प्रार्थी ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि पुल निर्माण के लिए तकनीकी तौर पर सही स्थल का चयन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
एनएच अथॉरिटी को देना होगा पांच लाख का मुआवजा
प्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। प्रार्थी कृष्ण निवासी सुंदरनगर, जिला मंडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश दिए।
प्रार्थी कृष्ण ने बताया है कि सुंदरनगर में एनएच 21 पर टनल का निर्माण करने से उसके घर को नुकसान हुआ है। टनल का निर्माण कर रही कंपनी द्वारा की जा रही ब्लास्टिंग से ऐसा हो रहा है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद एनएच अथॉरिटी को प्रार्थी के रहने के लिए वैकल्पिक मकान की व्यवस्था करने के आदेश भी दिए हैं।