जरूर पढ़ें हिमाचल हाइकोर्ट का ये अहम फैसला
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हिमाचल हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थलों में पशु बलि पर तुरंत प्रभाव से उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में कहा है कि प्रदेश में कोई व्यक्ति सार्वजनिक धार्मिक स्थलों और इनके परिसरों के आसपास यज्ञ, अनुष्ठान और पूजा के नाम पर पशु बलि नहीं देगा। न ही कोई व्यक्ति पशु बलि देने वाले का सहयोग करेगा।
हाईकोर्ट ने इसकी अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, उपमंडल अधिकारियों और एसएचओ को आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि धर्म के नाम पर बेजुबान पशुओं की बलि दी जानी चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर बदलते युग में सरकार को जागरूकता लानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने पेश किए गए फोटो को देखने के बाद कहा कि धर्म के नाम पर जो पशु बलि दी जा रही है, वह हृदयविदारक है। यह किसी भी परिस्थिति में जारी नहीं रखी जानी चाहिए।
भुंडा, शांद महायज्ञ में कटते हैं हजारों बकरे
अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार अष्टमी पर मंडी जिले में कमरूनाग, कामाक्षा माता मंदिर और अन्य मंदिरों में बकरों की बलि दी जाती है। इसी तरह रामपुर, रोहडू, कोटखाई, झाकड़ी और चिड़गांव में बकरों एवं भेड़ की बलि चढ़ाई जाती है। ये बलि स्थानीय लोग देवताओं को खुश करने के नाम पर देते हैं।
सिरमौर जिले के शिलाई में भी भेड़ और बकरों को त्योहारों में काटा जाता है। हिमाचल में देवताओं से संबंधित भुंडा और शांद जैसे महायज्ञों में एक साथ हजारों बकरे कटते हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य देव आयोजनों में भी पशु बलि के नाम पर बकरों को काटा जाता है। ऐसी परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं।