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आदेश की जांच परख करने पर हिमाचल हाईकोर्ट नाराज, जानिए पूरा मामला
Tue, 10 Dec 2019 04:53 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 10 Dec 2019 04:53 AM IST
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फाइल फोटो
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अदालती आदेशों की जांच परख करने पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी दर्ज की है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश चंद्र भूसन बारोवालिया की खंडपीठ ने निर्णय में कहा कि राज्य सरकार के उस दोषी अधिकारी के खिलाफ हमें अवमानना याचिका दायर करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है। जिसने अदालती निर्णय को परखने की कोशिश की है, लेकिन उक्त अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुका है इसलिए उसे माफ किया जाता है। मामले के अनुसार राज्य सरकार ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के उस निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी।
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जिसमें प्रतिवादी पीसी शर्मा की याचिका को ट्रिब्यूनल ने स्वीकार कर दिया था और प्रतिवादी की सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि ठीक किए जाने के आदेश दिए गए थे। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी पीसी शर्मा ने हाईकोर्ट के समक्ष भी इसी तरह की याचिका दायर की थी जिसमें हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि पीसी शर्मा के प्रतिवेदन पर निर्णय लिया जाए लेकिन राज्य सरकार के अधिकारी ने पीसी शर्मा के प्रतिवेदन को यह कहकर खारिज कर दिया कि सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि सिर्फ पांच वर्ष के भीतर ही ठीक कर सकते हैं।
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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए अपने निर्णय में कहा कि राज्य सरकार के अधिकारी को पीसी शर्मा के प्रतिवेदन पर निर्णय लेने के आदेश दिए गए थे जबकि राज्य सरकार के दोषी अधिकारी ने प्रतिवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया कि प्रतिवेदन करने के लिए काफी देरी हो चुकी है। इसलिए सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि ठीक नहीं की जा सकती। जबकि हाईकोर्ट ने पहले ही यह निर्णय दिया गया था कि सर्विस रिकॉर्ड में जन्मतिथि ठीक करने के लिए पांच साल का समय तो उचित है लेकिन यह पांच साल उस समय से गिने जाएंगे, जब प्रार्थी को इस बारे में पता चले इसलिए देरी से प्रतिवेदन किये जाने के आधार पर उसे खारिज नहीं किया जा सकता।
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