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Himachal: हिमाचल पर 98,182 करोड़ रुपये का कर्ज, सीएम ने विधानसभा सदन में दी लिखित जानकारी

Wed, 27 Aug 2025 10:06 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 27 Aug 2025 10:06 AM IST
सार

वित्त वर्ष 2025-26 में मूलधन चुकाने के लिए 4243.57 करोड़ रुपये और ब्याज अदायगी के लिए 6738.85 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

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Himachal has a debt of Rs 98,182 crore, CM gave written information in the Vidhan Sabha
हिमाचल पर बढ़ रहा कर्ज - फोटो : संवाद

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदन में लिखित जानकारी दी कि 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश पर कुल 98,182 करोड़ रुपये का ऋण है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूलधन चुकाने के लिए 4243.57 करोड़ रुपये और ब्याज अदायगी के लिए 6738.85 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। भरमौर के भाजपा विधायक डॉ. जनक राज के प्रश्न के जवाब में सीएम ने कहा कि जुलाई 2025 में लिया ऋण भी सरकार की ओर से बजट के माध्यम से विभिन्न विकासात्मक कार्यों के लिए खर्च किया जा रहा है। सरकार की ओर से लंबी अवधि यानी 22 वर्ष के लिए ऋण एक रणनीति के तहत लिया गया है, जिससे इसकी चुकौती का भार एक लंबे अंतराल तक न पड़े। 

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राज्य के अपने संसाधन सीमित होने के कारण प्रदेश सरकार को बजट के माध्यम से किए जाने वाले खर्च के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश की केंद्र पर निर्भरता और अधिक बढ़ी है, क्योंकि जीएसटी में प्रदेश की ओर से लगाए जाने वाले बहुत सारे कर मिलाए गए हैं। राज्य को जीएसटी लागू होने में वित्तीय हानि हुई है, जिसकी भरपाई केंद्र की ओर से प्रथम पांच वर्षों तक की गई, लेकिन 1 जुलाई 2022 से यह बंद हो गई। इसके अलावा 15वें वित्तायोग की ओर से अनुशंसित राजस्व घाटा अनुदान की राशि प्रथम वर्ष 2020-21 में 11431 करोड़ रुपये थी।

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आगामी वित्त वर्षों में तीव्र गति से कम होकर अंतिम वर्ष से यह बंद हो गई है। इसके अतिरिक्त 15वें वित्तायोग की ओर से अनुशंसित राजस्व घाटा अनुदान की धनराशि प्रथम वर्ष 2020-21 में 11431 करोड़ रुपये थी। आगामी वित्त वर्षों में तीव्र गति से कम होकर अंतिम वर्ष 2025-26 के लिए 3257 करोड़ रुपये ही रह गई। प्रदेश का ऋण भार आगामी कुछ महीनों में एक लाख करोड़ से अधिक हो जाना अनुमानित है। सरकार ने ऋण पर निर्भरता कम करने के लिए अपने संसाधनों से आय को बढ़ाने के लिए बहुत सारे उचित कदम उठाए हैं।

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