Himachal Pradesh: कड़छम-वांगतू से हिमाचल प्रदेश को मिलेगी 18% रॉयल्टी, सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत
सर्वोच्च न्यायालय ने कड़छम- वांगतू जलविद्युत परियोजना से रॉयल्टी को लेकर राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना से रॉयल्टी को लेकर राज्य सरकार के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अब जेएसडब्ल्यू एनर्जी कंपनी 1,045 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना से राज्य को 12 प्रतिशत के बजाय 18 प्रतिशत रॉयल्टी देगी। सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला खारिज होने से प्रदेश को अब सालाना 250 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होगी।
13 सितंबर, 2023 से बिजली कंपनी को अदायगी करनी होगी। 40 साल बाद हिमाचल सरकार के अधीन परियोजना आ जाएगी। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पामिदिघंतम श्री नरसिम्हा और न्यायाधीश जयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह फैसला दिया। इसके अतिरिक्त 12 वर्ष पूर्ण कर चुकी अन्य परियोजनाओं के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर बनेगा और राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से खजाने में प्रति वर्ष 250 करोड़ से अधिक की आय आएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत प्राथमिकता पर लेते हुए प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ प्रयास किए।
यह फैसला न केवल प्रदेश की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि हिमाचल की जनता को उनके संसाधनों का वास्तविक लाभ भी दिलाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मई 2024 में आए आदेश को निरस्त करता है, जिसमें कंपनी को केवल 12 प्रतिशत रॉयल्टी देने की अनुमति दी गई थी। वर्ष 1999 में राज्य सरकार और कंपनी के बीच हुए समझौते के अनुसार परियोजना के पहले 12 वर्षों तक 12 प्रतिशत और उसके बाद शेष 28 वर्षों तक 18 प्रतिशत रॉयल्टी निर्धारित की गई थी। सितंबर 2011 में परियोजना के संचालन के आरंभ होने के बाद कंपनी ने 12 वर्षों तक 12 प्रतिशत रॉयल्टी दी, लेकिन सितंबर 2023 से अतिरिक्त 6 प्रतिशत रॉयल्टी देने से इन्कार कर दिया। विवाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पहुंचा और कंपनी की जीत हुई, लेकिन राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
मुख्यमंत्री सुक्खू के निर्देश पर सरकार ने देश के अग्रणी विधि विशेषज्ञों की मदद से यह मामला सशक्त रूप से रखा और अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, प्राग त्रिपाठी, महाधिवक्ता अनूप कुमार रतन तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता बैभव श्रीवास्तव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार राज्न्के हितों की प्रभावी पैरवी कर रही है और यह निर्णय उसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे हिमाचल प्रदेश अपने हकों की दोबारा प्राप्ति में सफल हो रहा है।
सभी तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट से करवाया अवगत : अनूप
महाधिवक्ता अनूप रतन ने शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने अपने सभी तथ्यों को बारीकी से पीठ के समक्ष रखा। फैसला उनके पक्ष में आने के बाद प्रदेश को हर साल 150 करोड़ का लाभ होगा। उन्होंने बताया कि हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी।