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इतना पैसा फिजूल खर्च कर रही सरकार!
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 01 Dec 2014 02:08 PM IST
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एक तरफ सरकार खर्चा कम करने की बात कर रही है, दूसरी ओर सरकारी विभागों, निगम और बोर्डों के उच्च पदों पर बैठें अधिकारियों और नुमाइंदों के लिए टैक्सियां हायर कर इसका मासिक भुगतान 50 हजार से अधिक कर रही है। प्रदेश में 40 से अधिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, इन्हें भी सरकारी और आने जाने के लिए निजी वाहनों से सुविधा देने की बात कही जा रही है।
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सचिवालय राजकीय अर्धराजकीय चालक एवं परिचालक महासंघ ने इस बारे में रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी के चेयरमैन को इसकी शिकायत कर निजी वाहनों पर अंकुश लगाने की बात कही है। महासंघ के अध्यक्ष शांति स्वरूप ने कहा कि रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी खर्चा कम करने के लिए चालकों की संख्या कम और अधिकारियों को सीधे भत्ता दिए जाने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि एक सरकारी वाहन पर कम से कम 15 हजार रुपये खर्च आता है, जबकि टैक्सी का महीने 50 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
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सरकारी वाहन महंगे, जबकि निजी वाहन सरकार को सस्ते पड़ रहे हैं। इसके चलते निजी वाहनों को तरजीह दी जा रही है। एक चालक कम से कम 30 हजार रुपये में बैठता है। इसी तरह सरकारी वाहनों का खर्चा भी ज्यादा बैठ रहा है।
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- जीएस बाली, रिसोर्स मोबालाइजेशन कमेटी के सदस्य
सरकार चालकों को ही निशाना बना रही है, खर्चे कम करने के लिए चालकों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है। अनुबंध पर चालक की तैनाती और अन्य खर्चा मिलाकर 18 हजार रुपये आता है, जबकि निजी वाहन महंगे पड़ रहे हैं।
-शांति स्वरूप, चालक महासंघ अध्यक्ष