जयराम सरकार का एक साल: दृष्टिपत्र की इन घोषणाओं को अभी छुआ तक नहीं
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भाजपा के दृष्टिपत्र की कई घोषणाओं को पहले साल छुआ तक नहीं जा सका है। अगले पांच साल में जयराम सरकार को इन पर काम करना होगा। भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले 30 अक्तूबर 2017 को स्वर्णिम हिमाचल दृष्टिपत्र नाम से अपना घोषणापत्र जारी किया था। यह सही है कि इसमें दर्ज कई घोषणाओं को मुख्यमंत्री ने अपने पहले बजट भाषण में शुमार किया है, मगर अभी अगले चार साल के लिए भी सरकार के पास इन घोषणाओं को धरातल पर लागू करने का बहुत काम है।
इस दृष्टिपत्र में साफ किया गया था कि उद्योगों में 70 फीसदी की जगह 80 फीसदी नौकरियां हिमाचलियों को मिलेंगी, मगर इस बारे में सरकार को अभी बहुत काम करने की जरूरत है। सैन्य सेवा के प्रशिक्षण के लिए 200 बच्चों की क्षमता वाले मेजर सोमनाथ शर्मा स्कूल भी अभी नहीं खोले जा सके हैं। हिमाचल के लिए सेना की अलग रेजिमेंट की मांग को केंद्र से मनवाने को भी अभी वक्त लग सकता है। प्रदेश के हर जिले में मिनी स्टेडियम और खेल अकादमी स्थापित करने की भी घोषणा की गई, मगर अभी इस दिशा में काम रफ्तार नहीं पकड़ पाया है।
हर पंचायत में जिम और खेल के मैदान बनाकर खेलकूद गतिविधियों को बढ़ावा देने की भी बात की गई। जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों में मनोचिकित्सा विभाग के तहत नशा मुक्ति केंद्र खोलने की बात की गई। पुलिस की नई भर्तियों में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 33 फीसदी करने की बात भी हुई। ये बातें भी अभी सिरे नहीं चढ़ीं। सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में वाई फाई सुविधा मुहैया करवाने की दिशा में भी अभी शुरुआत ही हो पाई है। सरकार को पिछली ऐसी कई घोषणाओं पर फोकस करना होगा।
बजट की कई घोषणाएं अभी भी धरातल पर नहीं
बजट की कई घोषणाएं भी अभी धरातल पर लागू नहीं हो पाई हैं। बजट बुक को खोलें तो इसमें नरेंद्र मोदी की न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन की परिकल्पना पर चलने की बात की गई। इसमें यह घोषणा की गई कि अधिकतम काम ऑनलाइन ही होगा। सरकारी दफ्तरों में लोगों की आवाजाही कम से कम होगी।
विभागों से इसके लिए सरलीकरण के सुझाव छह महीने के भीतर मंत्रिमंडल के समक्ष लाने को कहे गए, मगर ये अब तक नहीं आ पाए और यह व्यवस्था पूरी तरह से शुरू ही नहीं की जा सकी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने बजट भाषण में 30 नई योजनाओं की घोषणा की, पर इनमें से अभी भी कई घोषणाएं धरातल पर लागू नहीं हो सकी हैं।