बिल्डरों पर नकेल कसेगा नया रियल इस्टेट विधेयक
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प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा में पारित रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी विधेयक से बिल्डरों पर नकेल कसी जा सकेगी। 2500 सौ स्क्वेयर मीटर से ज्यादा जमीन पर अपार्टमेंट बनाने पर 15 फीसदी यूनिट गरीबों के लिए आरक्षित रखनी होगी। इसमें लग्जरी यूनिट भी शामिल हैं।
अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो प्लॉट के कुल एरिया में से 10 फीसदी एरिया गरीबों के लिए आरक्षित रखना होगा। वहीं, 2500 सौ स्क्वेयर मीटर से ज्यादा जमीन खरीदने वाले लोग बिल्डर की श्रेणी में आएंगे। उन्हें अपार्टमेंट बनाने के लिए एक्ट के तहत बतौर बिल्डर रजिस्टर्ड होना पड़ेगा। अगर नियमों में कोताही बरती तो बिल्डर पर पेनल्टी लगेगी।
बिल के मुताबिक अपार्टमेंट के नक्शे पास करने को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में चयन समिति बनेगी। इसमें आईएएस, टीसीपी विभाग के अफसर, सेवानिवृत्त न्यायाधीश शामिल होंगे। कमेटी नक्शों को स्वीकृति देगी। 2500 स्क्वेयर मीटर से कम एरिया के नक्शों की अनुमति टाउन एंड कंट्री प्लानिंग महकमा देगा। विभाग के टाउन प्लानर लोगों के नक्शों को स्वीकृति देंगे।
सरकार ने विधानसभा में इस बिल को पास कर लिया है। अब राज्यपाल से इसकी मंजूरी मिलना बाकी है। उधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी) तरुण कपूर का कहना है कि 2500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा एरिया में अपार्टमेंट बनाने वाले बिल्डरों को रजिस्ट्रेशन करवानी होगी। इसके बाद ही वे कॉलोनियां बना पाएंगे।
8 से ज्यादा भी यूनिट बना सकेंगे बिल्डर
भवन मालिकों को आठ ही यूनिट मिलेंगे, जबकि बिल्डरों को इससे ज्यादा भी यूनिट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इन यूनिटों में रहने वाले लोगों को बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना बिल्डर का जिम्मा होगा।
15 साल के लिए बनेगी कमेटी
चयन समिति 15 साल के लिए बनेगी। इसके बाद कमेटी को नए सिरे से भी बनाया जा सकता है। शिक्षण संस्थान इसके दायर में नहीं आएंगे।
बेचने नहीं, खरीदने वालों पर पड़ेगी मार
हिमाचल में अगर कोई 2500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा जमीन बेचता है तो बेचने वालों पर नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन फीस खरीदने वालों से वसूली जाएगी।