सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों को झटका, सैलरी में होगी कटौती
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों के लिए बुरी खबर है। सरकार ने इनका वेतन कम करने का फैसला लिया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में तैनात 1500 से अधिक पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) का वेतन डेढ़ हजार रुपये तक घटने वाला है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने वेतन घटाने से पहले अक्तूबर 2012 के बाद नियमित हुए प्रवक्ताओं को नोटिस जारी किया है।
शनिवार को संबंधित स्कूल प्र्रिंसिपलों के माध्यम से जारी किए गए नोटिस में वेतन को क्यों न घटाया जाए। इसको लेकर प्रवक्ताओं से प्रिंसिपलों के माध्यम से 30 अगस्त तक उच्च शिक्षा निदेशक को जवाब देने का मौका दिया गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने वेतन घटने के लिए जिम्मेवार न्यूनतम पे बैंड को लागू करने के लिए हिमाचल प्रदेश के सिविल सर्विस नियमों का हवाला दिया है।
इस प्रक्रिया के तहत प्रवक्ताओं से अक्तूबर 2012 के बाद से लेकर अभी तक रिकवरी भी होगी। हालांकि, 30 अगस्त के बाद इस बाबत शिक्षा निदेशालय स्थिति स्पष्ट करेगा। उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने कहा है कि जोे पीजीटी 30 अगस्त से पहले नोटिस का जवाब नहीं देने वालों के लिए माना जाएगा कि उन्हें इस संदर्भ में कुछ भी नहीं कहना है। ऐसे में एक्स पार्टी फैसला ले लिया जाएगा।
वेतन में करीब डेढ़ हजार रुपये की कटौती
उच्च शिक्षा निदेशालय ने पे फिक्सेशन करते हुए यह फैसला लिया है। ऐसे में एक अक्तूबर 2012 के बाद नियमित होने वाले करीब 1500 पीजीटी का वेतन आने वाले दिनों में घटेगा। अनुबंध आधार और पैरा टीचर पॉलिसी 2003 के तहत अक्तूबर 2012 से पूर्व नियुक्त किए गए प्रवक्ताओं को पे स्ट्रक्चर 10300-34800 जमा 4200 रुपये ग्रेड पे पर नियुक्त किया गया था।
इन्हें इनिशियल स्टार्ट 16290 रुपये दिया गया। अब उच्च निदेशालय ने स्टेट सिविल सर्विस नियम 2012 के नियम 5(2) का हवाला देते हुए पीजीटी को न्यूनतम पे बैंड 10300 जमा 4200 रुपये ग्रेड पे पर फिक्स किया गया है। निदेशालय के इन आदेशों के चलते पीजीटी के वेतन में करीब डेढ़ हजार रुपये की कटौती होगी।
ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है टीजीटी का मामला
दो हजार से अधिक ट्रेंड ग्र्रेजुएट शिक्षकों (टीजीटी) के वेतन में एक हजार रुपये से अधिक की कटौती करने के आदेश जुलाई महीने में जारी किए गए थे। अधिक पे बैंड के तहत जारी की गई राशि की रिकवरी करने के आदेश भी प्रारंभिक निदेशालय ने दिए। इस पर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने रोक लगा दी है। मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।