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'नियमों को ताक पर रख कर सरकार ने फोरलेन विस्थापितों से कमाए 2205 करोड़'

Mon, 25 Sep 2017 05:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी Updated Mon, 25 Sep 2017 05:13 PM IST
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himachal govt ignored centre guidelines earned 2205 crores

हिमाचल के जिला मंडी में फोरलेन विस्थापितों के मुआवजे से प्रशासनिक खर्चे के नाम पर प्रदेश सरकार ने तीन वर्ष में 2205 करोड़ रुपये की कमाई की है। यह आय कीरतपुर-मनाली फोरलेन निर्माण में विस्थापितों को दिए गए मुआवजे में भू-अध्याप्ति व्यय मद से हुई है।

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यह दावा पूर्व एडीएम बीआर कौंडल, अधिवक्ता विजय ठाकुर बिलासपुर और आरटीआई कार्यकर्ता देशराज ने प्रेसवार्ता में किया। उन्होंने तीन वर्ष का हवाला देते हुए आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन को ताक पर रख कर विस्थापितों के मुआवजे पर नौ फीसदी राशि प्रशासनिक खर्च के नाम पर काटी गई है।
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जबकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट तौर पर ढाई फीसदी तक ही यह राशि काटने के निर्देश जारी किए हैं। साढ़े छह फीसदी अधिक काटा जा रहा है। मंडी के शिला किप्पर गांव में ही सरकार ने 1.67 करोड़ रुपये कमाया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से साढ़े छह फीसदी रकम को वापस करने की मांग उठाई है।  

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सरकार पर उठाए सवाल

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सरकार ने फैक्टर वन को लागू कर चार गुना मुआवजे से भी हजारों विस्थापितों को वंचित रखा है। कीरतपुर से नागचला तक कुल 2500 विस्थापितों के मामले सालों से मंडलायुक्त के पास लंबित हैं।

लेकिन, सरकार इस पर कार्यवाही नहीं कर रही। हजारों विस्थापितों को राष्ट्रीय उच्च मार्ग अधिनियम 1956 की धारा 2 (जी) में यह प्रावधान रखा गया है कि जिस भूमि अथवा मकान मालिक की भूमि और मकान का अधिग्रहण होता है, उसे मुआवजे की 10 फीसदी लॉस ऑफ अरनिंग के रूप में सरकार को चुकानी होती है। लेकिन, यह राशि भी विस्थापितों को नहीं दी गई है।  

मोदी और गडकरी से उठाएंगे मामला

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कहा कि  केंद्र सरकार ने भी भूमि अधिग्रहण नियम में 100 फीसदी सोलेशियम अदा करने का प्रावधान रखा है। कौंडल ने तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2015 में एक फैसले में सोलेशियम का भुगतान उचित ठहराया है।

लेकिन यह दिया नहीं गया है। सोलेशियम उसे कहते हैं, जिसमें लॉस का सौ फीसदी प्रभावित को मिलता है। साथ ही विस्थापितों की समस्याओं का समाधान करने के लिए मंडलायुक्त मंडी को अधिकृत कर प्रतिवादी बनाया गया है।

आरबिट्रेशन एंड कॉनशिलीयशन अधिनियम 2015 कर धारा 12 (5) के अनुसार मंडलायुक्त को प्रतिवादी नहीं बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले को पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष रखेंगे।

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