पीटीए शिक्षकों को सरकार ने दिया झटका, बंद होगी ग्रांट इन एड
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बीएड, टेट पास नहीं करने वाले और स्नातक में 50 फीसदी से कम अंक लेने वाले प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पीटीए पर तैनात शिक्षकों पर सरकार ने शिकंजा कस दिया है। इन्हें ग्रांट इन एड के तहत मिलने वाला मानदेय बंद हो जाएगा। उच्च और प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिला उपनिदेशकों से शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का ब्योरा तलब किया है।
प्रदेश सरकार ने अगस्त 2016 तक ऐसे शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को पूरा करने का मौका दिया था। निदेशालय एक माह के भीतर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करेगा, जिन्होंने सरकार के आदेशानुसार न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को पूरा नहीं किया है। हालांकि, ऐसे शिक्षकों की छुट्टी नहीं की जाएगी। इन्हें स्थानीय स्कूल स्तर पर पीटीए फंड से मानदेय मिलता रहेगा, लेकिन सरकार की ओर से दी जाने वाली ग्रांट इन एड बंद हो जाएगी।
अगस्त 2016 तक न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करने का दिया था मौका
साल 2014 में गठित हाई पावर कमेटी ने साल 2010 से पूर्व नियुक्त पीटीए शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के लिए अगस्त 2016 तक मौका दिया था। सरकार ने पीटीए के तहत रखे गए लेक्चरर के लिए शैक्षणिक योग्यता एमए और बीएड रखी है। इसके अलावा सीएंडवी शिक्षकों का शास्त्री में डिप्लोमा अनिवार्य है।
साल 2014 में हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में फैसला लेकर पीटीए शिक्षकों को प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन पूरी करने के लिए दो साल का मौका दिया गया था। अगस्त 2016 में मोहलत पूरी हो गई है। ऐसे में अब दोनों शिक्षा निदेशालयों ने शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों का मानदेय बंद करने का फैसला लिया है।