पढ़िए, इन चीजों की जमाखोरी पर लगी रोक
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खाद्य एवं परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा है कि हिमाचल में आलू और प्याज की जमाखोरी पर रोक लगा दी गई है। पहली बार इन खाद्य वस्तुओं के लिए अधिसूचना जारी कर सीमा तय की गई है। राज्य में कोई भी डीलर 20 क्विंटल से ज्यादा आलू और 10 क्विंटल से ज्यादा प्याज नहीं रख सकेगा।
इससे ज्यादा स्टाक किसी के पास पाए जाने पर सजा का प्रावधान किया गया है। वह सचिवालय में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। बाली ने कहा कि नई परिवहन नीति के तहत सिंगल बस रूट वाले गांवों में लक्ष्य समूह बनाए जा रहे हैं, ताकि बस सेवाएं बढ़ सकें। नई परिवहन नीति को लेकर अब तक पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने भी अहम सुझाव दिए हैं। डीजीपी ने भी अपनी राय व्यक्त की है। आम लोगों और एनजीओ को भी जोड़ा जा रहा है।
17 बस अड्डों को निर्माण जल्द
परिवहन मंत्री ने कहा कि बीओटी आधार पर 17 बस अड्डों को निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू हो रही है। अगले दो महीने में सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। कहा कि केंद्र ने रेल बजट में हिमाचल की अनदेखी की है।
हिमाचल में 11 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईटीआई संस्थानों की पालिसी केंद्र ने बदल दी है।
2015 से इन संस्थानों का यह दर्जा खत्म हो जाएगा। केंद्र ने ही पहले सोलन, रामपुर, ऊना, शाहपुर, चंबा, नादौन, हमीरपुर, नाहन, मंडी और शिमला को यह दर्जा दिया था। अब इनका भार भी राज्य सरकार पर आ जाएगा।
सीएम और सुक्खू दोनों अपनी जगह सही
बाली ने कहा कि प्रदेश सरकार और संगठन पूरी तरह स्थिर है। कोई संकट नहीं है। संगठन की ओर से जो किया जा रहा है, वह संगठन के अध्यक्ष के कार्यक्षेत्र में आता है। जबकि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अगुवाई में सरकार भी एकजुट है।
दोनों अपना-अपना काम कर रहे हैं। दावा किया कि कांग्रेस सरकार पूरे पांच साल चलेगी। उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि लोकसभा में चारों सीटें हारने के कारण कांग्रेस को गंभीर चिंतन की जरूरत है।
चावल मिलता रहे तो कम नहीं होगा कोटा
खाद्य मंत्री ने कहा कि सस्ता राशन स्कीम में दी जा रही दालों के मूल्यों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। तेल भी बाजार से सस्ते दाम पर दिया जा रहा है। गेहूं आटे के आवंटन में एकरूपता लाई गई है।
पूरे प्रदेश में 14 किलो आटा दिया जा रहा है। नई दिल्ली में हुए राज्य खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्र सरकार राज्य को चावल की अतिरिक्त आपूर्ति करने पर सहमत हो गई है। जब तक ये सप्लाई रहेगी, तब तक उसी अनुपात में चावल मिलता रहेगा।
टांडा को एम्स का दर्जा मिलना चाहिए
बाली ने कहा कि कांगड़ा के टांडा मेडिकल कॉलेज को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) में बदला जाना चाहिए। यहां इस दिशा में अधोसंरचना उपलब्ध है। इसके लिए आवश्यक भूमि प्रदेश सरकार उपलब्ध करवाएगी।
केंद्र सरकार ने एम्स की स्थापना के लिए जमीन उपलब्ध करवाने को कहा है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने टांडा का नाम भेजा है, जबकि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह चाहते हैं कि नेरचौक मेडिकल कालेज को एम्स बनाएं।