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हिमाचल के पहाड़ों पर आखिर कब चढ़ेगी उम्मीदों की रेल

Tue, 31 Jan 2017 12:20 AM IST
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 31 Jan 2017 12:20 AM IST
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himachal govt expectations from rail budget 2017

92 साल से चली आ रही रेल बजट की व्यवस्था खत्म होने के बाद पहली बार 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का संयुक्त बजट संसद में पेश होगा। इसके साथ ही इस बार हिमाचल प्रदेश को हर साल रेल बजट के नाम पर झुनझुना के सिलसिले के थमने की उम्मीद की जा रही है। इस बजट से हिमाचल को रेल नेटवर्क के विस्तार की काफी उम्मीद है। 

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मोदी सरकार के पिछले दो बजट में हिमाचल की झोली में महज 805 करोड़ रुपये ही आए। ऊंट के मुंह में जीरा जैसे इस बजट का ही नतीजा है कि एक ओर जहां कई घोषणाओं के बावजूद सर्वे तक नहीं हो सका, वहीं कई प्रोजेक्ट सर्वे से आगे जमीन पर नहीं उतर पा रहे। ऐसे में इस साल संयुक्त बजट से रेल लाइनों के पहाड़ चढ़ने की उम्मीद है। 
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सांसदों ने भी अपनी ओर से केंद्रीय बजट में हिमाचल को रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए जोर लगा रखा है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली लेह लाइन से लेकर चंबा, हमीरपुर, बद्दी-बिलासपुर तक रेल लाइन के लिए बजट का प्रावधान करने के लिए पैरवी की गई है। लेकिन देखना यह होगा कि संयुक्त बजट में सांसदों की कोशिशों और पुरानी प्रथाओं के खत्म होने के बाद हिमाचल की झोली में क्या आता है। 
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इन प्रोजेक्टों को बजट की दरकार
मोदी सरकार आने के बाद हिमाचल को नया कुछ भी नहीं मिला। 2015 के रेल बजट में भानुपल्ली बिलासपुर रेल लाइन के सर्वे के लिए 160 करोड़, नंगल तलवाड़ा रेल लाइन के लिए 100 करोड़, चंडीगढ़ बद्दी रेल लाइन के लिए 95 करोड़, ऊना हमीरपुर रेल लाइन का सर्वे एक साल में पूरा करने, ऊना अंब के बीच रेल लाइन के विद्युतीकरण का एलान हुआ। 

2016 के बजट में परवाणू-दाड़लाघाट, बद्दी-बिलासपुर, बिलासपुर-रामपुर, अंब-कांगड़ा, पालमपुर-धर्मशाला, ऊना-हमीरपुर, जोगिंद्रनगर-मंडी रेल रूट के लिए सर्वे का एलान हुआ। इसके लिए सत्तर लाख रुपये का प्रावधान किया गया। इसके अलावा पठानकोट जोगिंद्रनगर ट्रैक ब्राडगेज करने के लिए भी सर्वे का एलान हो चुका है। 


सर्वे ज्यादा, काम कम
प्रदेश का दुर्भाग्य रहा है कि केंद्र सरकारों ने प्रदेश में रेल नेटवर्क के लिए सर्वे कराने का एलान तो किया लेकिन जमीन पर एक इंच भी पटरी नहीं ला सकीं। ज्यादातर प्रोजेक्टों पर सर्वे तक का काम आधा भी पूरा नहीं हो सका। सामरिक दृष्टि वाली मनाली लेह लाइन आज तक एलान के  इंतजार में है। यही कारण है कि पर्यटन हब होने के बावजूद आज भी प्रदेश की बड़ी आबादी और यहां आने वालों को रेल सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। 

संसदीय क्षेत्रों को यह है उम्मीद
शिमला

चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन सर्वे का काम पूरा होने पर जमीन पर काम शुरू हो
शिमला-कालका के बीच छोटे स्टेशनों को आधुनिक बनाया जाए
पंजाब के धनौली से नालागढ़-पांवटा साहिब होकर देहरादून तक रेल कनेक्टिविटी हो
कंडाघाट-रोहडू़ के बीच नई रेल लाइन के लिए सर्वे हो

हमीरपुर
ऊना-हमीरपुर रेललाइन का बेसिक सर्वे पूरा, अब प्रोजेक्ट के लिए बजट की उम्मीद
भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन के लिए बजट का प्रावधान
नंगल-तलवाड़ा रेललाइन के ग्राउंड वर्क शुरू करने के लिए बजट
मनाली-लेह लाइन को बिलासपुर-भानुपल्ली से जोड़कर बजट में एलान हो

मंडी
पठानकोट से मंडी के बीच रेललाइन बने और चीन सीमा तक विस्तार हो
बिलासपुर-भानुपल्ली के बीच रेल लाइन बने

कांगड़ा
पठानकोट से मंडी के बीच बड़ी लाइन बनाई जाए
भानुपल्ली से बिलासपुर के बीच रेललाइन के लिए बजट का प्रावधान हो
बिलासपुर से मंडी के बीच रेललाइन
चंबा को जोड़ने के लिए नई रेललाइन का सर्वे

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