नहीं मिल रही जमीन, सरकार ने केंद्र से मांगी इसके लिए मंजूरी
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प्रदेश के जंगलों में स्थान न मिलने के बाद प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से जंगल से सटे ऐसे स्थानों पर पौधरोपण की मंजूरी मांगी है जो अभी वन क्षेत्र अधिसूचित नहीं हैं। सरकार ने यह कवायद इसलिए शुरू की है ताकि सिर्फ कंपलसरी एफॉरेस्टेशन के लिए जगह न मिलने की वजह से अटके विभिन्न तरह के उद्योगों और प्रोजेक्टों को शुरू किया जा सके।
केंद्र सरकार के रुख के बाद सरकार आगे की रणनीति तैयार करेगी। प्रदेश में कई सौ करोड़ के ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो सिर्फ इसलिए अटके हुए हैं कि उन्हें नियमों में पेड़ काटने के बदले जरूरी पौधरोपण के लिए जगह नहीं मिल रही। सरकार ने पहले तो काफी प्रयास किए कि वनों के बीच में खाली स्थानों पर पौधरोपण कर लिया जाए।
वन अधिसूचित न होने वाले क्षेत्रों में भी पौधारोपण करने की मांगी अनुमति
लेकिन अब जंगल के अंदर खाली जमीन न मिलने की वजह से पौधरोपण नहीं हो पा रहा। इसके बाद अब प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि वह उन क्षेत्रों में पौधरोपण की मंजूरी दे, जो अभी वन क्षेत्र अधिसूचित नहीं है।
दरअसल, अभी तक किसी भी वन भूमि का अगर गैरवानिकी कार्य के लिए लैंड यूज बदला जाता है तो उस क्षेत्र में कटने वाले पेड़ों के बदले तय नियमों के अनुसार वन क्षेत्र में पौधरोपण करना आवश्यक है।
जब तक पौधरोपण न हो जाए तब तक प्रोजेक्ट लगने से लेकर उसे शुरू करने में अड़चन रहती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव वन तरुण कपूर ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार से पत्राचार किया जा रहा है। वहां से स्पष्टीकरण या निर्देश आने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।