सरकार ने लिया फैसला, छीनी पंचायतों की शक्तियां
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सरकार ने पंचायतों से शक्तियां छीन ली हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। हिमाचल में पंचायतें अब बिजली प्रोजेक्टों और सड़क निर्माण के लिए होने वाले खनन का विरोध नहीं कर सकेंगी। सरकार ने सड़क और बिजली परियोजनाओं के विकास के लिए ग्राम पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में शामिल पत्थरों के खदान के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला लिया है।
इसके सरलीकरण के उद्देश्य से यह निर्णय वीरवार को राज्य में खनन गतिविधियों की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की और उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी इसमें मौजूद थे। क्रशरों के आवंटन और विभिन्न औपचारिकताओं जैसे वन स्वीकृतियां, पर्यावरण विभाग, पंचायतों और अन्य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने में होने वाले अनावश्यक विलंब के कारण विकास परियोजनाएं विशेषकर सड़क निर्माण के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इसलिए राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल बनाते हुए भविष्य में सड़क और बिजली परियोजनाओं के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र की शर्त को हटा दिया है। अब गतिशील यानी लाइव रजिस्टरों का रखरखाव किया जाएगा और क्रशरों की स्थापना के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों का ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा। इसकी मासिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी। सभी एसडीएम को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्टोन क्रशरों की स्थापना के बारे में समयबद्ध रूप से अपनी रिपोर्ट सौंपें।
6000 करोड़ से अधिक बजट से बन रहे सड़क प्रोजेक्ट
मुख्य सचिव वीसी फारका ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण राज्य में 6000 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि से सड़क परियोजनाएं कार्यान्वित कर रहा है। यह राज्य सरकार का उत्तरदायित्व है कि क्रशरों की स्थापना में प्राधिकरण को अपना पूरा सहयोग दे जिससे इस कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा न हो।
पूर्व सरकार के शासन में कम क्रशरों से ठप पड़े काम : अग्निहोत्री
उद्योग मंत्री ने खदानों की स्थापना के लिए खनन नीति में बदलाव और प्रक्रिया के सरलीकरण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में 150 कानूनी स्टोन क्रशर संचालित हैं जबकि पूर्व सरकार के शासन में मात्र 12 से 15 क्रशर थे, जिस कारण विकास कार्य ठप पड़ गए थे।
पंचायतों में ऑनलाइन रिपोर्ट से रुकेगा फर्जीवाड़ा
राज्य सरकार ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पंचायतों को विकास कार्यों का डाटा हर दिन ऑनलाइन करने को कहा है। मजदूरों की दिहाड़ी से लेकर विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाली कंस्ट्रक्शन सामग्री की रिपोर्ट अब प्रतिदिन अपडेट करनी होगी। ऐसा न करने पर पंचायत सचिवों पर कार्रवाई होगी।
पंचायती राज विभाग को शिकायतें मिल रही हैं कि बजट लेने के लिए ग्राम सभाओं में लोगों के फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। ग्राम सभाओं में उपस्थित न होने पर लोगों के हस्ताक्षर घरों में कराए जा रहे हैं। इससे लोगों को न तो पंचायतों को जारी धन की जानकारी होती है और न ही वार्डों में कराए जाने वाले विकास कार्यों की।
अब मनरेगा के कार्य से लेकर लोगों को दिए जाने वाले जन्म, मृत्यु व विवाह पंजीकरण का डाटा भी ऑनलाइन करना होगा। विभाग ने इसके लिए सॉफ्टवेयर तैयार किए हैं। बता दें कि बीते पंचायत चुनाव में 70 से अधिक पंचायत प्रधानों पर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसमें कई प्रधानों को सस्पेंड भी किया गया था। गड़बड़ी रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।
पंचायतों में होने वाली हर गतिविधि पर विभाग की नजर रहेगी। इसके लिए विकास कार्यों का डाटा प्रतिदिन अपलोड करने को कहा गया है। इससे विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहेगी। दिहाड़ी से लेकर पंचायतों के विकास कार्यों के लिए दिए जाने वाले सीमेंट, सरिये आदि की रिपोर्ट भी प्रतिदिन अपडेट करनी होगी। - आर. सेलवम, निदेशक पंचायती राज विभाग