बागवानों से भद्दा मजाक, कइयों को 25 रुपये दी राहत राशि
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सेब समेत नकदी फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए कई किसानों के बैंक खातों में राहत राशि के नाम पर महज 25 रुपये जमा हुए हैं। राहत राशि की रकम देखकर किसानों के पांव तले जमीन खिसक गई है। सितंबर 2018 में अचानक हुई बर्फबारी से घाटी में करोड़ों की सेब और अन्य नकदी फसल जमींदोज हो गई थी। गुस्साए किसानों ने प्रशासन से मिली इस मुआवजा राशि को विरोध स्वरूप मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने की तैयारी कर ली है।
जनजातीय क्षेत्र के किसानों और बागवानों ने प्राकृृतिक आपदा के चलते साल 1955 के बाद दूसरी बार इतनी भारी तबाही को देखा। सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने कृषि, बागवानी और राजस्व महकमों के जरिए फसलों के नुकसान का आकलन किया। त्रासदी के करीब तीन महीने बाद नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग को पीडि़त किसानों के बैंक खातों में राहत राशि जमा करने के निर्देश जारी किए।
राहत राशि के इंतजार में बैठे किसानों के बैंक खातों में जब 25 रुपये की राशि जमा होने का मोबाइल फोन पर मैसेज मिला तो वह हैरान रह गए। प्रशासन ने लाहौल-स्पीति के करीब 2800 प्रभावित किसानों और बागवानों के खातों में राहत के नाम पर लगभग 54 लाख रुपये जमा किए हैं।
14 बीघा से अधिक जमीन वाले कुछ किसानों को सात हजार तक राहत राशि जारी हुई है। लेकिन करीब 80 फीसदी किसानों को 25 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक ही राहत राशि मिली है। दस फीसदी प्रभावितों को 25 रुपये, बीस फीसदी प्रभावितों को पांच सौ रुपये तक की मुआवजा राशि दी गई है। किसान राकेश, रोहित, विनोद, किशन, सुरेश, दोरजे, छेरिंग, तंडुप, सोनम और दिनेश ने कहा कि मुआवजे के नाम पर दी गई यह राशि भद्दा मजाक है।
बर्फबारी के कारण सेब से लदे दो लाख से अधिक पेड़ क्षतिग्रस्त हुए और गोभी, आलू समेत अन्य नगदी फसलों को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचा। प्रति किसान को मिली राहत राशि से अधिक पैसे तो रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रशासन ने कागजों और फोटोस्टेट में खर्च किए हैं। उधर, एसडीएम अमर नेगी ने कहा कि प्रशासन ने सरकारी मापदंडों के तहत नुकसान का आकलन करने के बाद ही किसानों को राहत राशि जारी की है।
20 सेब पौधों से हो जाती है 50 हजार आय
प्रभावित बागवानों की मानें तो अच्छी किस्म के 20 फलदार पौधे भी हों तो खर्च निकाल कर 50 हजार रुपये तक की आमदन हो जाती है। ऐसे में प्रशासन ने फसल बरबादी का आकलन कौन से अजब फार्मूले से किया है, यह समझ से परे है।