फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal folk artist famous Clarinet player of himachal surajmani will perform in america

अमेरिका में गूंजेगी मंडी के देवताओं के साथ बजने वाली हिमाचल के सूरजमणि की शहनाई

Mon, 25 Feb 2019 12:24 PM IST
ashok chauhan त्रिपुरारी सांख्यान, अमर उजाला, मंडी
त्रिपुरारी सांख्यान, अमर उजाला, मंडी Published by: ashok chauhan Updated Mon, 25 Feb 2019 12:24 PM IST
विज्ञापन
Himachal folk artist famous Clarinet player of himachal surajmani will perform in america

हिमाचली लोकगीतों में बहुत कम ऐसे गीत होंगे, जिन्हें मंडी के प्रसिद्ध शहनाईवादक सूरजमणि ने अपनी शहनाई की मधुर ध्वनि से नहीं पिरोया होगा। प्रदेश और देश में अपनी शहनाई का जादू दिखाने वाले इस कलाकार की शहनाई जल्द विदेशों में भी गूंजने वाली है।

विज्ञापन


इन्हें अमेरिका की एक संस्था ने अप्रैल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम का निमंत्रण दिया है। उनका वीजा भी बन गया है। वह अप्रैल में वहां जाएंगे। बॉलीवुड फिल्म ‘पल-पल दिल के साथ’ के गीतों सहित वह चार हजार से अधिक लोकगीतों को शहनाई के सुरों में पिरो चुके हैं।
विज्ञापन


उन्हें शिवरात्रि, दशहरा, मिंजर, लवी मेले के मंचों ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। नौ साल की आयु में अपने पूर्वजों से शहनाई वादन के गुर सीखने वाले इस कलाकार ने शहनाई वादन का काम मंडी के देवी-देवताओं के साथ शुरू किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

मात्र तीसरी कक्षा तक शिक्षित

धीरे-धीरे मंगलाचारी परिवार होने के कारण इन पर अपने पुश्तैनी काम की भी जिम्मेदारी पड़ गई और यह दूर-दूर तक घरों में शादी, जन्मदिन और अन्य शुभ कार्यों में जाकर अपनी शहनाई बजाते रहे।

मात्र तीसरी कक्षा तक शिक्षित इस कलाकार की इस कला का जादू इस कदर बोला कि जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।

सूरजमणि बताते हैं कि उनको अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से सबसे अधिक पहचान मिली है। आज भी इस मेले की सांस्कृतिक संध्याओं का आगाज इनकी शहनाई से होता है। 
 

मां और ताया से ली शिक्षा

सूरजमणि ने बताया कि इनकी माता मर्ची देवी अच्छी गायक थीं और बेहतरीन ढोलक बजाती थीं। इनके ताया गुजू राम संगीत कला के बहुत बड़े जानकार थे। माता और ताया से उन्हें शहनाई वादन की बहुत अधिक शिक्षा मिली है। देवी-देवताओं के साथ शहनाई बजाकर और दूर-दूर तक मंगलाचार सुनाकर उनकी शहनाई की कला में नया निखार आता रहा। 

युवा आगे आएं तो सिखाने को तैयार
लोक कलाकार ने कहा कि आधुनिक दौर में शहनाई की कला लुप्त हो रही है। युवाओं में इस कला को सीखने की कोई रुचि नहीं दिख रही है। कई युवा कलाकार आधुनिकता भरे गीत और संगीत में डूब चुके हैं। इस कला से हर कोई मुंह फेर रहा है। उन्होंने इस पर चिंता जताई और युवा कलाकारों को इस कला को जीवंत रखने के लिए आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी कुछ मदद करे तो वह युवाओं को निशुल्क सिखाने को तैयार हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed