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हिमाचल: प्रत्येक कर्मी सेवाकाल में एक बार दुर्गम इलाके में दे सेवाएं, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

Fri, 27 Jun 2025 10:26 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 27 Jun 2025 10:26 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के तबादले को लेकर राज्य सरकार की नीति पर एक बार फिर कड़ी टिप्पणी की है। 

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Himachal: Every employee should serve in a remote area once during his service period, High Court gave instruc
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के तबादले को लेकर राज्य सरकार की नीति पर एक बार फिर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों को निर्देश जारी करें। इसमें सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक कर्मी अपने सेवाकाल में एक बार जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दें। अदालत ने मुख्य सचिव को इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड पर रखने को कहा है। अदालत ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने पहले ही कठिन और जनजातीय क्षेत्र में सेवाएं दे दी हैं, उन्हें बार-बार ऐसे स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों में अनावश्यक अशांति फैलती है और स्थानांतरण नीति केवल कागजी बनकर रह गई है। नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी कर्मचारियों को समान रूप से ऐसे क्षेत्रों में सेवा करने का अवसर मिले।

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याचिकाकर्ता ने अदालत से कपल केस के आधार पर सुविधाजनक स्थान पर तबादले की मांग की थी। एकल पीठ ने सक्षम प्राधिकारी को याचिकाकर्ता के आवेदन पर अगले 10 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। प्राधिकारी निर्णय लेते समय कपल केस और उन कर्मचारियों को मिलने वाली रियायतों का ध्यान रखें, जिन्होंने पहले जनजातीय और कठिन क्षेत्र में सेवा दी है। कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों के राजनीतिक संबंध और प्रभाव होते हैं, उन्हें अकसर कठिन क्षेत्र में नहीं भेजा जाता है। ऐसे कर्मचारी जिनकी सरकार के गलियारों में पहुंच नहीं होती, उन्हें बार-बार ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

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फार्मा, ड्रग टेस्टिंग लैब की स्थिति पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से फार्मा टेस्टिंग लैब और ड्रग टेस्टिंग लैब की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत ब्योरा तलब करने के मामला आदेश दिए हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यदि यह प्रयोगशालाएं चालू हैं तो इनमें उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या और खाली पदों का भी व्योरा अदालत को दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और रंजन शर्मा की खंडपीठ मामले की सुनवाई 31जुलाई को करेगी। अदालत ने यह आदेश दवाओं की गुणवत्ता जांचने वाली इन महत्वपूर्ण प्रयोगशालाओं की स्थापना में हो रही देरी पर दिए हैं।

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याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि प्रदेश में दवाओं की शुद्धता और गुणवत्ता जांचने के लिए दो प्रयोगशालाओं की स्थापना में देरी हो रही है। न्यायालय इस मामले की सुनवाई 2023 से कर रहा है। याचिका में दवा परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना से संबंधित एक आवेदन दायर किया गया है। आवेदन में बताया गया है कि बद्दी में प्रस्तावित ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशाला के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 30 करोड़ और 3.25 करोड़ आवंटित किए हैं। खंडपीठ ने कहा कि फार्मा टेस्टिंग लैब की स्थापना में एक दशक बीत चुका है। न्यायालय ने पाया कि हलफनामे में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि इस ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशाला की वर्तमान स्थिति और चरण क्या है। 

डिफेसमेंट एक्ट लागू करने पर सरकार हाईकोर्ट में स्थिति करेगी स्पष्ट
 प्रदेश सरकार नए 7 नगर निगमों, 17 नगर परिषदों और 23 नगर पंचायतों पर डिफेसमेंट (संपत्ति विरूपण अधिनियम) एक्ट लागू करने पर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करेगी। 25 जून को हुई सुनवाई में सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि डिफेसमेंट एक्ट 1985 की उप धारा 3 के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए 26 अप्रैल 2025 को अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना के माध्यम से 7 नगर निगमों, 17 नगर परिषदों और 23 नगर पंचायतों को उक्त अधिनियम के दायरे में लाया गया है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर को रोकने के लिए योग्य कदम उठाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई 5 अगस्त को होगी। 

रेरा कार्यालय के स्थानांतरण पर अब 23 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकार की ओर से रेरा कार्यालय स्थानांतरण मामले में 23 जुलाई को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि 21 जून 2025 को हाईकोर्ट को एक संचार पत्र प्राप्त हुआ है। इसमें 4 जून 2025 और 21 जून 2025 को हिमाचल प्रदेश रेरा कार्यालय के स्थानांतरण का उल्लेख किया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने रेरा मुख्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने को दुर्भावनापूर्ण बताया है।

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