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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Energy conservation standards must be followed for buildings larger than 750 square meters.

हिमाचल: 750 वर्ग मीटर से बड़े भवनों पर ऊर्जा संरक्षण के मानकों का पालन अनिवार्य, नियम अधिसूचित

Fri, 16 Jan 2026 11:17 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 16 Jan 2026 11:17 AM IST
सार

7 जनवरी को जारी इस अधिसूचना के तहत प्रदेश के सभी शहरी और विशेष क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी। 

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Himachal: Energy conservation standards must be followed for buildings larger than 750 square meters.
बड़े भवनों पर ऊर्जा संरक्षण के मानकों का पालन अनिवार्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। 7 जनवरी को जारी इस अधिसूचना के तहत प्रदेश के सभी शहरी और विशेष क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी। सरकार ने इस मसौदे पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। नए नियमों के अनुसार 750 वर्ग मीटर या उससे अधिक निर्मित क्षेत्र वाले भवनों पर ऊर्जा संरक्षण मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इसमें होटल, रिसॉर्ट, अस्पताल, क्लीनिक, प्रयोगशालाएं, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, व्यावसायिक भवन, शिक्षण संस्थान, थिएटर, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे शामिल हैं। 

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मिश्रित उपयोग वाले भवनों में यदि किसी अन्य श्रेणी का हिस्सा कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से अधिक है, तो उस हिस्से के लिए अलग से निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग इंसेंटिव की व्यवस्था की है।
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यदि कोई भवन इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के तहत गोल्ड/प्लेटिनम, एकीकृत आवास मूल्यांकन के लिए हरित रेटिंग प्रणाली के तहत 4 या 5 स्टार अथवा एसोचैम ग्रीन एवं पर्यावरण-अनुकूल की 4 या 5 रेटिंग प्राप्त करता है, तो उसे 0.25 अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेश्यो बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दिया जाएगा। हालांकि, यदि कोई नियमों के तहत सभी व्यावसायिक, सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक भवनों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग प्वाइंट बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, निर्माण की पूरी प्रक्रिया में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा निदेशालय द्वारा पंजीकृत ऊर्जा ऑडिटर की नियुक्ति जरूरी होगी। ऑडिटर डिजाइन से लेकर निर्माण पूर्ण होने तक विभिन्न चरणों में प्रमाणपत्र जारी करेंगे, जिनके आधार पर ही ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

गा।

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ईवी चार्जिंग प्वाइंट जरूरी एफएआर में छूट, उल्लंघन पर 10 गुना जुर्माना
डेवलपर अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेश्यो लेने के बाद तय ग्रीन रेटिंग हासिल नहीं कर पाता, तो उसे सामान्य अनुमति शुल्क का 10 गुना जुर्माना देना हो

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