{"_id":"614c87b78ebc3e09df2360c5","slug":"himachal-electricity-board-put-up-death-pole-by-breaking-the-roof-of-the-house","type":"story","status":"publish","title_hn":"किन्नौर: 35 साल से ‘मौत’ के खंभे से जूझ रही जिंदगी, अब जागा बिजली बोर्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किन्नौर: 35 साल से ‘मौत’ के खंभे से जूझ रही जिंदगी, अब जागा बिजली बोर्ड
Fri, 24 Sep 2021 01:17 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, भावानगर (किन्नौर)
अमर उजाला नेटवर्क, भावानगर (किन्नौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 24 Sep 2021 01:17 PM IST
सार
बिजली बोर्ड ने 35 साल पहले इस परिवार के घर की छत काटकर हाईटेंशन लाइन का बिजली का खंभा खड़ा कर दिया। उस समय घर की सिर्फ एक मंजिल थी। यह मामला साल 1986 का है। जब बोर्ड ने खंभा यहां खड़ा किया तब परिवार बाहर रहता था। जब परिवार के लोग घर वापस आए तो खंभा देखकर हैरान रह गए।
विज्ञापन
घर में लगाया बिजली का खंभा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकारी विभागों के कामकाज के तरीके से आम आदमी किस कदर परेशान होता है। इसका उदाहरण किन्नौर के शांगो गांव का एक परिवार है। बिजली बोर्ड ने 35 साल पहले इस परिवार के घर की छत काटकर हाईटेंशन लाइन का बिजली का खंभा खड़ा कर दिया। उस समय घर की सिर्फ एक मंजिल थी। यह मामला साल 1986 का है। जब बोर्ड ने खंभा यहां खड़ा किया तब परिवार बाहर रहता था। जब परिवार के लोग घर वापस आए तो खंभा देखकर हैरान रह गए।
विज्ञापन
परिवार के मुखिया चंदु राम नेगी ने (अब इस दुनिया में नहीं) बोर्ड से खंभा हटाने की अपील की। उनकी अपील पर बोर्ड ने कान बंद कर दिए जो आज तक नहीं खुले। 35 साल हो गए। बोर्ड से गुहार लगाते-लगाते चंदु राम दुनिया से चल बसे, पर खंभा अभी वहीं है। चंदु राम के बाद घर के दूसरे लोग बार-बार खंभा हटाने की मांग करते रहे, लेकिन इनकी सुनवाई आज तक नहीं हुई। एक मंजिला मकान छोटा था, तो परिवार ने ऊपर की दो और मंजिलें बनवा लीं।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: आईएएस अफसरों को 11 फीसदी डीए जारी करने के मामले में हिमाचल सरकार का यू टर्न
विज्ञापन
इन दो मंजिलों की छत खंभे से हिसाब से काटनी पड़ी है। स्व. चंदु राम की पत्नी बसंती देवी ने बताया कि उनके पति और वह 35 साल से खंभा हटाने की मांग कर रहे हैं। बिजली बोर्ड ने जब यह खंभा उनके घर में लगाया, तब वे घर पर नहीं रहते थे। उनका परिवार झाकड़ी में रहता था। बसंती देवी ने कहा कि जीवन भर की कमाई से पाई-पाई जोड़कर घर बनाया। मगर अब उन्हें उस घर पर एक पल भी गुजारना खतरे से खाली नहीं है।
बारिश में लगते है करंट के झटके, पुराने मकान में रहना मजबूरी
बारिश के समय घर पर करंट के झटके महसूस होते हैं। इस कारण बारिश के समय वह परिवार सहित पुराने मकान में रहने को मजबूर हैं। बिजली बोर्ड भावानगर के सहायक अभियंता आशीष ने बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला लाया गया है। बिजली के खंभे को बदला जा सकता है, लेकिन इसके लिए लोग जमीन नहीं दे रहे। वे अधिकारियों से बात करेंगे। जल्द ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।