Shimla: भारद्वाज का टिकट बदलते ही शिमला शहरी भाजपा में बगावत, जानें पूरा मामला
बुधवार सुबह टिकटों की घोषणा होते ही भारद्वाज समर्थक छोटा शिमला स्थित उनके आवास पर पहुंच गए। पूर्व मेयर सत्या कौंडल समेत कई पूर्व भाजपा पार्षद शिमला शहरी भाजपा अध्यक्ष राजेश शारदा और मंडलों के पदाधिकारी मंत्री से मिलने पहुंच गए।
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शिमला शहरी विधानसभा सीट से लगातार तीन चुनाव जीतने वाले शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज का टिकट बदलते ही शहरी भाजपा में बगावत हो गई है। बुधवार सुबह टिकटों की घोषणा होते ही भारद्वाज समर्थक छोटा शिमला स्थित उनके आवास पर पहुंच गए। पूर्व मेयर सत्या कौंडल समेत कई पूर्व भाजपा पार्षद शिमला शहरी भाजपा अध्यक्ष राजेश शारदा और मंडलों के पदाधिकारी मंत्री से मिलने पहुंच गए। इन्होंने पार्टी के टिकट बदलने के फैसले पर सवाल उठा दिए। कहा कि मंत्री ने शिमला शहर में काम किए हैं। ऐसे में उन्हें इसी सीट से टिकट मिलना चाहिए था। कसुम्पटी से टिकट देने का पार्टी का फैसला गलत है। दोपहर तक सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंच गए। इन्होंने पार्टी के फैसले के खिलाफ कुछ देर नारेबाजी भी की।
कहा कि शिमला शहर से भारद्वाज के अलावा किसी के लिए प्रचार नहीं करेंगे। हालांकि, इस दौरान मंत्री खामोश रहे। उन्होंने इस फैसले पर आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद मंडल और शिमला शहरी भाजपा के कई पदाधिकारियों ने आपस में चर्चा कर अपने पदों से इस्तीफे देने का फैसला ले लिया। एक कागज पर पूर्व मेयर सत्या कौंडल समेत कई पार्षदों ने हस्ताक्षर कर पार्टी के फैसले को गलत ठहराया। हालांकि, अभी यह कागज या इस्तीफे पार्टी को नहीं भेजे गए हैं। शिमला शहरी मंडल अध्यक्ष राजेश शारदा ने कहा कि मंत्री भारद्वाज को शिमला शहर सीट से मौका मिलना चाहिए था। शिमला शहरी मंडल ने फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
फूट-फूटकर रोई पूर्व मेयर सत्या
बुधवार सुबह मंत्री के आवास पर पहुंचते ही पूर्व मेयर सत्या कौंडल फूट-फूट कर रोने लगीं। कहा कि पार्टी ने टिकट का गलत आवंटन कर दिया। कौंडल ने कहा कि मंत्री ने पूरा राजनीतिक जीवन शिमला शहर की जनता की सेवा में लगाया है। पानी, स्मार्ट सिटी, डेवलपमेंट प्लान समेत कई प्रोजेक्ट लाने में मदद की, लेकिन पार्टी ने उनका टिकट बदल दिया।
मेयर-डिप्टी मेयर बनाने पर हुआ था घमासान
ढाई साल पहले नगर निगम में महापौर और उप महापौर बनाने को लेकर शिमला शहर और कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के बीच खूब खींचतान चली थी। पूर्व मंत्री दिवंगत नरेंद्र बरागटा के ज्यादातर करीबी पार्षद कसुम्पटी क्षेत्र से संबंध रखते हैं। चाहते थे कि हर बार शिमला शहर से मेयर बनता है, इस बार कसुम्पटी से किसी को मौका दिया जाए, लेकिन भारद्वाज गुट इन पर भारी था। बाद में शिमला शहर से बरागटा गुट से उप महापौर बनाने पर सहमति बनी। अब भारद्वाज इसी कसुम्पटी क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरेंगे। मौजूदा समय में यह चेतन बरागटा के कट्टर समर्थक माने जाते हैं।
विजय ज्योति सेन की दो टूक
विजय ज्योति सेन ने कहा कि सुरेश भारद्वाज को शिमला शहर से ही टिकट दें। अगर भाजपा कसुम्पटी से टिकट नहीं बदलती तो अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों का फैसला मानकर मजबूरन उन्हें आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ना पड़ेगा।
घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे कार्यकर्ता : भारद्वाज
शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने नामांकन भरने के सवाल पर कहा कि कार्यकर्ता घर से नहीं निकलने दे रहे हैं। पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।