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समीकरण: चार से सात फीसदी मतों के अंतर से हिमाचल में बनती रही हैं सरकारें, जानें रोचक जानकारी
Sat, 12 Nov 2022 05:53 AM IST
Krishan Singh
अनिमेष कौशल, शिमला
अनिमेष कौशल, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 12 Nov 2022 05:53 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में चार से सात फीसदी मतों के अंतर से सरकारें बनती रही हैं। जब-जब मत प्रतिशतता बढ़ी तो राजनीतिक दलों की सीटों में भी बड़ा अंतर देखा गया।
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हिमाचल प्रदेश सत्ता संग्राम 2022
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देवभूमि हिमाचल प्रदेश में चार से सात फीसदी मतों के अंतर से सरकारें बनती रही हैं। जब-जब मत प्रतिशतता बढ़ी तो राजनीतिक दलों की सीटों में भी बड़ा अंतर देखा गया। विधानसभा चुनाव-दर-चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार और अन्य दल भी 12 से 15 फीसदी तक लेते रहे हैं। कई सीटों पर जीत-हार के समीकरण बदलने की यह भी बड़ी वजह रही है। आम आदमी पार्टी पहली बार प्रदेश में 67 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी भी कई सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
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वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों को कुल 49.53 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। कांग्रेस को 42.32 फीसदी और निर्दलियों को 6.34 फीसदी मत मिले थे। मत प्रतिशतता में आए 7.21 फीसदी के अंतर के चलते भाजपा को प्रदेश में 44 सीटें प्राप्त हुईं। कांग्रेस सिर्फ 21 सीटों तक रुक गई। माकपा को एक और निर्दलियों को दो सीटें प्राप्त हुईं। वर्ष 2012 के चुनाव में भाजपा से 4.38 मत अधिक प्राप्त कर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। इस दौरान कांग्रेस को 43.21, भाजपा को 38.83 और निर्दलियों व अन्य दलों को 15 फीसदी वोट मिले थे। वर्ष 2012 में कांग्रेस ने 36 सीटें जीती थी। भाजपा को 26, हिलोपा को एक और पांच निर्दलीय जीते थे।
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वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 43.78 फीसदी, कांग्रेस को 39.54 फीसदी और निर्दलियों को 14.34 फीसदी मत प्राप्त हुए थे। इस चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 4.24 फीसदी रहा था। भाजपा ने इस चुनाव में 41 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। कांग्रेस को 23, बसपा को एक और निर्दलियों को तीन सीटें मिली थी। वर्ष 2003 के चुनाव में कांग्रेस को 41 फीसदी, भाजपा को 35.38 और निर्दलियों को 16.27 फीसदी पद प्राप्त हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने 43 सीटें जीती थी। भाजपा सिर्फ 16 सीटों में सिमट गई थी।
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हिमाचल विकास कांग्रेस, एलएमएचपी और एलजेएनएसपी ने एक-एक और निर्दलियों ने छह सीटें जीती थी। कांग्रेस ने वर्ष 2003 में 5.62 फीसदी अधिक मत प्राप्त कर सरकार बनाई थी। वर्ष 1998 का चुनाव काफी दिलचस्प रहा था। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस ने 31-31 सीटें जीती थी। कांग्रेस का मत प्रतिशतता 43.51 फीसदी और भाजपा का 39.02 फीसदी रहा था। हिमाचल विकास कांग्रेस ने पांच सीटें जीती थी। एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी। इस दौरान कुछ दिनों की कांग्रेस की सरकार बनी थी। बाद में भाजपा ने हिमाचल विकास कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई थी।
विनोद सबसे अधिक, जगत सबसे कम मतों से जीते
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार विनोद कुमार जिला मंडी के नाचन से सबसे अधिक मतों से जीते थे। विनोद कुमार ने 15,896 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। विनोद को 38,154 मत मिले थे। इनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के लाल सिंह कौशल को 22,258 मत प्राप्त हुए थे। सबसे कम अंतर से किन्नौर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार जगत सिंह नेगी जीते थे। इनकी जीत का अंतर 120 मत था। जगत सिंह नेगी को 20,029 और भाजपा प्रत्याशी तेजवंत सिंह नेगी को 19,909 मत मिले थे।