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चुनावी मुद्दा: हिमाचल में 28 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों को मिले महज आश्वासन
Sat, 05 Nov 2022 10:43 AM IST
Krishan Singh
विपिन काला, शिमला
विपिन काला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 05 Nov 2022 10:43 AM IST
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चुनावी मुद्दा हिमाचल।
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अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल में सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो या भाजपा की। वर्षों से सरकारी विभागों में लगे हजारों आउट सोर्स कर्मचारियों को महज कोरे आश्वासन ही मिलते रहे हैं। ठोस नीति के अभाव में इन करीब 28,000 कर्मचारियों के भविष्य पर लटकी अनिश्चितता की तलवार अभी तक नहीं हट पाई है। हालांकि, चुनाव करीब आते देख राजनीतिक दल इस बड़े तबके के वोट बैंक को भुनाने की हर संभव कोशिश करते रहे हैं। प्रदेश भर में आउट सोर्स कर्मचारी वर्ष 2000 से विभिन्न सरकारी विभागों में अस्थायी तौर पर अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं।
राज्य सरकारों से हर बार कोरे आश्वासन मिलते रहे हैं और कई ठोस नीति नहीं बनाई जा सकी। जयराम सरकार के पांच साल के कार्यकाल के दौरान भी दर्जनों बार आउट सोर्स कर्मचारियों के लिए सरकार और अफसरशाही से नीति बनाने का मामला उठाते रहे लेकिन, कोई राहत नहीं मिली। इतना जरूर है कि जयराम सरकार ने कार्यकाल के आखिरी पड़ाव में इसे लेकर थोड़ी सक्रियता दिखाई। सरकार ने आउट सोर्स कर्मचारियों को सरकारी स्तर पर नई कंपनी का गठन कर उसके अधीन लाने का फैसला लिया गया है।
कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती से हुई आउट सोर्स शुरुआत
प्रदेश के स्कूलों में आउट सोर्स भर्ती की शुरुआत हुई। इसके तहत स्कूलों में 1350 कंप्यूटर शिक्षकों की तैनाती की गई। कंप्यूटर शिक्षक सरकारी स्कूलों में 15 सालों से सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों को 12 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। कई ऐसे शिक्षक भी है जो अभी तक आउट सोर्स में है और उनके छात्र रहे युवा स्थायी नौकरी कर रहे हैं।
मानदेय भुगतान में होती है देरी
सरकार ने कंपनी के साथ समझौता किया था कि आउट सोर्स कर्मचारियों को हर माह की 7 तारीख तक मानदेय का भुगतान होना है। इसकेबाद संबंधित कंपनी ने संबंधित विभाग के पास अपने बिल देने होते हैं और फिर सरकार स्तर से भुगतान करना था। अधिकांश कंपनियां इन आउट सोर्स कर्मचारियों को 15 या 20 तारीख तक मानदेय का भुगतान करती रही हैं।
कंपनियां नहीं देती कोई मानदेय की स्लिप
राज्य के आउट सोर्स कर्मचारियों को नौकरी देने वाली ठेकेदार कंपनी मानदेय का भुुगतान ऑनलाइन करती रही हैं लेकिन, अधिकांश कंपनियों में वेतन स्लिप देने की प्रथा नहीं है। कुछ कंपनियां ही मानदेय की स्लिप देती हैं। समझौते के अनुसार कंपनी को कर्मचारियों की ईपीएफ और जीएसआई की जानकारी संबंधित विभाग के लेखा अधिकारी के पास देनी जरूरी है। कंपनियां इस मामले में भी मनमानी करती रही हैं।
आउट सोर्सिंग के काम में 125 कंपनियां
प्रदेश में आउट सोर्स कर्मचारियों की भर्तियां 125 ठेकेदार कंपनियों के माध्यम से की गई थी। मंत्रिमंडल उप समिति ने जब आउट सोर्स कर्मचारियों के बारे में रिकार्ड जुटाने का काम आरंभ किया तो 115 कंपनियों का कोई रिकार्ड नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि इन फर्जी कंपनियों को विभागों से भुगतान होता रहा है। यह खुलासा भी जयराम सरकार के कार्यकाल पांचवें साल के अंत में हो पाया।
क्या कहते हैं कि संघ के अध्यक्ष
हिमाचल प्रदेश आउट सोर्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शैलेश कहते हैं कि कर्मचारियों के लिए अभी तक कोई ठोस नीति नहीं बनी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि आउट सोर्स कर्मचारी निकाले नहीं जाएंगे। जब तक नीति नहीं बनेगी, तब तक इन कर्मचारियों को नए निगम के अधीन लाया जाएगा। अब चुनाव के बाद काबिज होने वाली सरकार से ही उम्मीद की जा सकती है।
नीति नहीं तो वोट नहीं
संघ के महासचिव अवधेश सरोच कहते हैं कि आउट सोर्स कर्मचारियों ने चुनाव में ठोस नीति नहीं तो वोट नहीं पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। राजनीतिक दल अपने चुनाव घोषणा पत्र में आउट सोर्स के बार में क्या भरोसा देंगे, उसके बाद यह इस फैसले की समीक्षा कर अंतिम फैसला लेंगे।