फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Bilaspur News ›   himachal election 2022, Election issue, Eighth, ninth century mythological temples not found even after 61 ye

चुनावी मुद्दा: 61 साल बाद भी नहीं मिला आठवीं, नौवीं सदी के पौराणिक मंदिरों को ठिकाना

Fri, 28 Oct 2022 12:30 PM IST
Krishan Singh सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
सरोज पाठक, संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Published by: Krishan Singh Updated Fri, 28 Oct 2022 12:30 PM IST
सार

गोबिंद सागर झील की गाद में हर साल बिलासपुर का इतिहास समाता जा रहा है। आठवीं और नौवीं सदी के बने बिलासपुर शहर के ऐतिहासिक मंदिर झील में समा रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार के अभी तक के प्रयास नाकाफी रहे हैं।

विज्ञापन
himachal election 2022, Election issue, Eighth, ninth century mythological temples not found even after 61 ye
नौवीं सदी के पौराणिक मंदिर। - फोटो : संवाद

विस्तार

 गोबिंद सागर झील की गाद में हर साल बिलासपुर का इतिहास समाता जा रहा है। आठवीं और नौवीं सदी के बने बिलासपुर शहर के ऐतिहासिक मंदिर झील में समा रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार के अभी तक के प्रयास नाकाफी रहे हैं। 61 वर्ष बाद भी इन मंदिरों को ठिकाना नहीं मिला है।  इन मंदिरों के संरक्षण के लिए कवायद तो कई बार शुरू हुई, लेकिन सफल नहीं हो पाई। कई बार मंदिरों के पुनर्स्थापन को लेकर केंद्र तक की टीमों ने सर्वे किए। पुरातत्व विभाग ने मंदिरों को शिफ्ट करने के लिए कार्य शुरू किया, लेकिन अभी तक कोई भी इसमें सफल नहीं हो पाया है। पुराने बिलासपुर शहर के इतिहास पर नजर डालें तो प्राचीन मंदिरों में खण खेसर मंदिर, गोपाल मंदिर, वाह का ठाकुरद्वारा, रघुनाथ मंदिर, मुरली मनोहर का मंदिर, खाकी शाह की मजार, प्राचीन मस्जिद और राजाओं के महल आदि शामिल हैं। इनमें से कई मंदिर गोबिंद सागर झील में पूरी तरह समा चुके हैं। जबकि, कुछ गाद के बीच हैं। लोगों की आस्था इन मंदिरों से जुड़ी हुई है, लेकिन आस्था का प्रतीक यह मंदिर अनदेखी के चलते झील की गाद में दफन हो रहे हैं। आस्था के साथ जिले की ऐतिहासिक धरोहर और पर्यटन की संभावनाएं भी झील के पानी में हर साल डूबती हैं। 

विज्ञापन


गोर हो कि ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने या अन्य स्थानों पर दोबारा स्थापित करने के लिए जमीन की तलाश की गई थी। बंदला रोड पर काला बाबा कुटिया के पास इसके लिए करीब 28 बीघा जमीन भी चिह्नित कर दी गई थी। साल 2019 में इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज डेवलपमेंट टीम के विशेषज्ञों ने बिलासपुर के सांडू से मंदिरों में लगे पत्थर के नमूने भी लिए थे। इससे पता लगाया जाना था कि यह पत्थर देश में कहां पाया जाता है। इसके बाद भी इस योजना को आगे न बढ़ाते हुए दूसरी योजना पर कवायद शुरू कर दी गई। साल 2021 में प्रदेश सरकार ने घोषणा की कि बिलासपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन मंदिरों को उनकी जगह ही लिफ्ट कर दिया जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च होना है। वहीं, इस साल सांडू मैदान से जहां पर इन मंदिरों को लिफ्ट किया जाना है, वहां से मिट्टी के नमूने भी लिए गए हैं, ताकि पता चल सके कि इस जगह मंदिरों को लिफ्ट करना मुमकिन है या नहीं, लेकिन यह योजना भी सिरे चढ़ेगी या सिर्फ कागजों में ही सिमट जाएगी, इस बारे में अभी कुछ भी कहना सही नहीं होगा। 
विज्ञापन


शिखर शैली के हैं मंदिर
बिलासपुर के सांडू में आठवीं और नौवीं सदी में बने यह मंदिर शिखर शैली के हैं। यह शैली उत्तर भारत के मंदिरों की प्रमुख पहचान है। शिखर का सबसे महत्वपूर्ण भाग सबसे ऊपर लगा आमलक होता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

मंदिरों को लिफ्ट करने लिए 1,500 करोड़ की योजना की जा रही है तैयार

himachal election 2022, Election issue, Eighth, ninth century mythological temples not found even after 61 ye
नौवीं सदी के पौराणिक मंदिर। - फोटो : संवाद

गोबिंद सागर झील में जलमग्न पौराणिक मंदिरों के लिए हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 1,500 करोड़ रुपये लागत की महत्वाकांक्षी परियोजना तीन चरणों में क्रियान्वित की जाएगी। गुजरात के गांधीनगर के पास सरदार सरोवर प्रोजेक्ट और यूपी के वाराणसी में बनाए गए कॉरिडोर के मॉडल को स्टडी कर इस परियोजना को पूर्ण रूप दिया जाएगा। पहले चरण में नाले के नौण को डेवलप कर मंदिरों को अपलिफ्ट किया जाएगा और दूसरे चरण में सांडू के मैदान को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना है, जबकि तीसरे चरण में मंडी भराड़ी के पास बैराज बनाकर मंदिरों के आसपास एक जलाशय बनाया जाएगा। इसमें रिवर फ्रंट और वॉक वेज इत्यादि विकसित किए जाएंगे।

मिट्टी के सैंपल पास, बजट प्रस्ताव पर्यटक विभाग को भेजा 
हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के चीफ इंजीनियर पवन शर्मा ने कहा कि मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 1,500 करोड़ की परियोजना पर काम शुरू हो गया है। मंदिरों को लिफ्ट करने के लिए दो जगह से मिट्टी के सैंपल लिए गए थे। दोनों सैंपल पास हो गए हैं। नाले के नौण में लिफ्ट होने वाले मंदिरों का मॉड्यूल भी आ गया है। इसके लिए 105 करोड़ का बजट चाहिए। उन्होंने बजट प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेज दिया है। अभी झील का पानी भरा है। जैसे ही पानी उतरेगा अन्य जगह से भी मिट्टी के सैंपल लिए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed