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अब एक हजार रुपये से महंगी पुस्तक नहीं खरीदेगा शिक्षा विभाग
Fri, 09 Jul 2021 10:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 09 Jul 2021 10:12 AM IST
सार
वर्ष 2018-19 में शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी की 8 से 385 रुपये तक और निजी प्रकाशकों की 1800 रुपये तक की पुस्तकें खरीदी हैं
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में पढ़ने के लिए अब एक हजार रुपये से अधिक कीमत की पुस्तकें नहीं रखी जाएंगी। बीते वर्षों में चहेते नेताओं, सेवानिवृत्त अफसरों और प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदी गई हैं। वर्तमान में जारी पुस्तक खरीद प्रक्रिया पर लगे आरोपों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने महंगी पुस्तकें न खरीदने का फैसला लिया है। इस वर्ष खरीदी जाने वाली पुस्तकों की खरीद प्रक्रिया की इन दिनों जांच जारी है।
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चयनित कंपनियों के आवश्यक दस्तावेजों की जांच अगले सप्ताह तक पूरी होने के आसार हैं। सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए हर वर्ष समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से पुस्तकों की खरीद की जाती है। वर्ष 2018-19 में शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी की 8 से 385 रुपये तक और निजी प्रकाशकों की 1800 रुपये तक की पुस्तकें खरीदी हैं। एक प्रकाशक से 1800 रुपये का किताबों का सेट प्रदेश भर के प्राइमरी, मिडल और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के पुस्तकालयों के लिए खरीदा गया।
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इसके अलावा वर्ष 2018-19 में एक नेता, सेवानिवृत्त अफसरों सहित कुछ विशेष प्रकाशकों की कई महंगी पुस्तकें भी खरीदी गई हैं। अब इन विवादों से बचने के लिए शिक्षा विभाग ने एक हजार रुपये से महंगी किताबें नहीं खरीदने का फैसला लिया है। तीन जुलाई के अंक में अमर उजाला ने बीते वर्षों में खरीदी गई महंगी पुस्तकों का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा विभाग ने पुरानी व्यवस्था में अब बदलाव कर दिया है।
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