Himachal: गुणात्मक शिक्षा बढ़ाने को हिमाचल ने केंद्र सरकार से मांगे बकाया 400 करोड़
प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 400 करोड़ रुपये की बकाया किस्त जल्द जारी करने का आग्रह किया है।
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हिमाचल प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 400 करोड़ रुपये की बकाया किस्त जल्द जारी करने का आग्रह किया है। शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली में हुई शिक्षा मंत्रालय की समीक्षा बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने खर्च किए गए 400 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब भी दिया। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष जारी की गईं दोनों किस्तों को खर्च कर दिया गया है। अब तीसरी किस्त के तौर पर प्रदेश को जल्द 400 करोड़ जारी होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वोकेशनल शिक्षा, आईसीटी लैब, वर्दी-किताबों की खरीद, स्मार्टरूम, वेतन और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर पैसा खर्च किया गया। अप्रैल में धर्मशाला में शिक्षा मंत्रालय की समीक्षा बैठक करवाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक राजेश शर्मा भी बैठक में शामिल हुए। बीते वर्ष जनवरी के दौरान राज्य सरकार ने केंद्र से 2200 करोड़ रुपये का बजट मांगा था। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए यह बजट प्रस्ताव भेजा गया था। फरवरी में हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में केंद्र सरकार ने 800 करोड़ रुपये का बजट हिमाचल के लिए मंजूर किया था। पहली और दूसरी किस्त के तौर पर हिमाचल सरकार को केंद्र ने 200-200 करोड़ रुपये जारी किए थे।
वोकेशनल शिक्षा, आईसीटी लैब, वर्दी, किताबों, वेतन और शिक्षकों के प्रशिक्षण सहित स्मार्ट क्लासरूम बनाने और खेल गतिविधियों को बढ़ाने, पुस्तकालयों को मजबूत करने, डिजिटलाइजेशन को बढ़ाने के लिए यह धनराशि खर्च की गई। 75 फीसदी राशि को प्रदेश सरकार खर्च कर चुकी है। इसके तहत स्कूलों में नए कोर्स शुरू किए गए। सरकारी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षाओं का दायरा बढ़ाया गया। विशेष बच्चों के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के साथ मिलकर शिक्षा देने के लिए काम करने की भी योजना बनाई। दो किस्तों का 75 फीसदी हिस्सा खर्च करने के बाद राज्य सरकार ने तीसरी किस्त जारी करने का आग्रह किया।