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हिमाचल प्रदेश: पानी के भंडार पर गाद का कब्जा, हिमाचल के कई डैम की क्षमता 25% से ज्यादा घटी

Sun, 30 Aug 2026 12:42 PM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 30 Aug 2026 12:42 PM IST
सार

हिमाचल के प्रमुख जलाशयों में लगातार गाद जमा होने से उनकी पानी रखने की क्षमता घट रही है। केंद्रीय जल आयोग के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में कई जलाशयों की मूल लाइव स्टोरेज क्षमता में 25 फीसदी से अधिक कमी सामने आई है। केंद्र ने राज्य सरकार को मिशन मोड में डिसिल्टिंग की विस्तृत योजना बनाने को कहा है। चंबा के बैरा जलाशय के लिए विशेष सेडिमेंट मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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himachal dams sediment 25 percent storage capacity decrease
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : एआई

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में लगातार बढ़ रहे गाद के जमाव पर केंद्र सरकार ने चिंता जताई है। जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग की सचिव अर्चना वर्मा ने मुख्य सचिव केके पंत को पत्र भेजकर जलाशयों से गाद निकालने के लिए मिशन मोड में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने आगाह किया है कि समय रहते सेडिमेंट मैनेजमेंट नहीं किया गया तो जलाशयों की उपयोगिता और जल सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

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केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में सामने आया है कि हिमाचल के कई जलाशयों की मूल लाइव स्टोरेज क्षमता में 25 फीसदी से अधिक की कमी हो चुकी है। लगातार गाद जमा होने से इन जलाशयों में पानी संग्रह करने की क्षमता घट रही है। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो भविष्य में जलाशयों की उपयोगिता और कम हो सकती है। बाद के चरण में गाद निकालने की प्रक्रिया अधिक महंगी और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। जलाशयों की घटती भंडारण क्षमता का असर केवल पानी संग्रह तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हिमाचल में जलविद्युत उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए गाद प्रबंधन की अनदेखी से भविष्य में बिजली उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका है।
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छोटे जलाशयों में स्थानीय लोगों की भागीदारी
केंद्र ने छोटे बांधों और जल निकायों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है। पत्र में बताया गया है कि कई छोटे जलाशय सूखे के मौसम में पूरी तरह या काफी हद तक सूख जाते हैं। ऐसे स्थानों पर भारी मशीनरी के बजाय स्थानीय स्तर पर गाद निकाली जा सकती है। इसके लिए वीबी-जी रामजी-2026 योजना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। केंद्र के अनुसार दूसरे राज्यों में इस तरह के मॉडल का सफल प्रयोग किया गया है।

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चंबा के बैरा जलाशय के लिए बनाएं विशेष प्लान
चंबा जिले के बैरा जलाशय को इस अभियान में प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्र के पत्र के अनुसार गाद जमने से बैरा जलाशय की 25 फीसदी से अधिक लाइव स्टोरेज क्षमता प्रभावित हो चुकी है। इसके लिए विशेष सेडिमेंट मैनेजमेंट प्लान तैयार कर उसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास और ऊर्जा विभाग को तत्काल विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार और संबंधित बांध प्रबंधन एजेंसियों को ऐसे जलाशयों की सूची तैयार करने को कहा गया है, जहां गाद की समस्या गंभीर हो चुकी है। केंद्र ने इस काम के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया है। - केके पंत, मुख्य सचिव, हिमाचल सरकार

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