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Himachal CM: केंद्रीय वित्त मंत्री से मिले मुख्यमंत्री सुक्खू, हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता का किया अनुरोध

Thu, 15 Jan 2026 06:51 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 15 Jan 2026 06:51 PM IST
सार

वीरवार को नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश को उदार सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal cm Sukhu met the Union Finance Minister and requested financial assistance for Himachal
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पुष्प गुच्छ भेंट करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट कर उनसे राज्य की वित्तीय स्थिति पर चर्चा की और हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग देने का आग्रह किया। सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए ज्ञापन और अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष निर्धारित किए जाने का आग्रह किया। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व एवं व्यय अनुमानों के यथार्थवादी आकलन करने को कहा।

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मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से एक ‘ग्रीन फंड’ के गठन की पैरवी करते हुए कहा कि इसमें प्रति वर्ष 50,000 करोड़ रुपये का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य देश की ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और उनकी पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने होरिजेंटल डिवेल्यूवेशन के लिए राज्य की ओर से प्रस्तावित संशोधित फार्मूले की जानकारी भी दी, इसमें वन एवं वनों पर आधारित पारिस्थितिकी के मानदंड का विशेष ध्यान रखने की मांग की गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर मौजूद रहे।

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आपदा जोखिम सूचकांक को दोबारा परिभाषित करने की जरूरत पर बल दिया
मुख्यमंत्री सुक्खू ने 15वें वित्त आयोग की ओर से विकसित आपदा जोखिम सूचकांक को दोबारा परिभाषित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य क्षेत्रों से नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए हैं। उन्होंने विशिष्ट संकेतकों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डीआरआई तथा पृथक आवंटन की मांग की।
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सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य को अतिरिक्त सहयोग देने का अनुरोध किया और राजस्व घाटा अनुदान में पिछले कुछ वर्षों में आई भारी कमी के कारण राज्य की वित्तीय क्षमता पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव का उल्लेख करते हुए जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने की मांग की।
 

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