फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal cm jairam thakur and Prem kumar dhumal group in state politics

राम राज के बाद अब धूमल खेमा दबाव में, नेता का कैसे होगा पुनर्वास

Mon, 25 Dec 2017 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 25 Dec 2017 12:38 PM IST
विज्ञापन
Himachal cm jairam thakur and Prem kumar dhumal group in state politics

पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने से आहत उनके समर्थकों पर जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री तय होने से दबाव बढ़ गया है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अब धूमल के लिए क्या भूमिका तय करता है? यह सवाल उनके समर्थकों में बना हुआ है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के मुख्यमंत्री नहीं बनने से धूमल का केंद्र में जाने का रास्ता आसान नहीं है।

विज्ञापन


प्रदेश संगठन में उनके कद के नेता को कई ओहदा भी नहीं दिया जा सकता, जबकि केंद्रीय संगठन में इसकी गुंजाइश कम है। पार्टी सूत्रों की मानें तो धूमल के बढ़े कद का इस्तेमाल अगले लोकसभा चुनाव के हिसाब से तय किया जाएगा।
विज्ञापन


इसको लेकर केंद्रीय नेतृत्व के मंथन में उन्हें राज्यसभा सांसद का पद या फिर किसी प्रदेश का राज्यपाल बनाने पर सहमति फिलहाल नहीं बन पाई है। अगले कुछ महीने तक धूमल पर कोई फैसला नहीं होगा। संभावना है कि लोकसभा चुनाव के आसपास या बाद में उनका राजनीतिक पुनर्वास संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन


धूमल के खेमे ने उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाया, लेकिन काम नहीं आया। कई विधायक विरेंद्र कंवर, सुखराम चौधरी, कर्नल इंद्रजीत, विनोद, हंसराज आदि उनके पक्ष में बताए जा रहे थे। कंवर सबसे पहले उनके लिए सीट खाली करने को आए।

पर्यवेक्षकों के सामने समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। पांच में से तीन सांसद उनके विरोध में रहे। केंद्र की ओर से इशारा होने के बाद धूमल खेमा बैकफुट पर आया। मुख्यमंत्री का नाम घोषित होने से एक दिन पहले धूमल को प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी पड़ी कि वे कभी पद की रेस में नहीं थे। नड्डा के नाम पर मुहर नहीं लगना भी धूमल के लिए झटका माना जा रहा है।

हमीरपुर में जनाधार बढ़ाने की चुनौती

Himachal cm jairam thakur and Prem kumar dhumal group in state politics

चुनाव में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की 17 सीटों से सात में हार पार्टी की बड़ी चिंता है। साढ़े तीन साल में 6 सीटों में जनाधार गिरा है। धूमल और प्रदेश अध्यक्ष सत्ती हारे हैं। सीट पर धूमल के बेटे अनुराग सांसद हैं।

अनुराग से ज्यादा अब यह चुनौती धूमल के सामने रहेगी कि डेढ़ वर्ष में गिरे मतदान प्रतिशत को कैसे बढ़ाया जाए।

समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में लाना
धूमल की हार के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि धूमल समर्थक विधायकों में से कितनों को जयराम मंत्रिमंडल में जगह मिलती है। सूत्रों की मानें तो उनकी ओर से कुछ नाम सुझाए गए हैं। नरेंद्र बरागटा, विरेंद्र कंवर, सुखराम चौधरी आदि रेस में हैं। अब देखना है कि कौन से विधायक मंत्री पद की शपथ लेते हैं।

सीएम को मेरा पूरा समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि नए मुख्यमंत्री को मेरा पूरा समर्थन होगा। केंद्रीय नेतृत्व ने जो निर्णय लिया है वो उसके साथ हैं।

विधायक दल की बैठक के लिए पहुंचे पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने उनके पक्ष में नारेबाजी को लेकर पूर्व सीएम शांता कुमार के अनुशासनहीनता के बयान पर पलटवार किया है।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा जिन लोगों ने घरों में पार्टी के झंडे तक नहीं लगाए वो आज अनुशासनहीनता की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी फैसला उनके संदर्भ में पार्टी ने लिया है उन्होंने उसे मानकर जी जान से काम किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed