राम राज के बाद अब धूमल खेमा दबाव में, नेता का कैसे होगा पुनर्वास
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पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने से आहत उनके समर्थकों पर जयराम ठाकुर के मुख्यमंत्री तय होने से दबाव बढ़ गया है। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अब धूमल के लिए क्या भूमिका तय करता है? यह सवाल उनके समर्थकों में बना हुआ है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के मुख्यमंत्री नहीं बनने से धूमल का केंद्र में जाने का रास्ता आसान नहीं है।
प्रदेश संगठन में उनके कद के नेता को कई ओहदा भी नहीं दिया जा सकता, जबकि केंद्रीय संगठन में इसकी गुंजाइश कम है। पार्टी सूत्रों की मानें तो धूमल के बढ़े कद का इस्तेमाल अगले लोकसभा चुनाव के हिसाब से तय किया जाएगा।
इसको लेकर केंद्रीय नेतृत्व के मंथन में उन्हें राज्यसभा सांसद का पद या फिर किसी प्रदेश का राज्यपाल बनाने पर सहमति फिलहाल नहीं बन पाई है। अगले कुछ महीने तक धूमल पर कोई फैसला नहीं होगा। संभावना है कि लोकसभा चुनाव के आसपास या बाद में उनका राजनीतिक पुनर्वास संभव है।
धूमल के खेमे ने उनको मुख्यमंत्री बनाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाया, लेकिन काम नहीं आया। कई विधायक विरेंद्र कंवर, सुखराम चौधरी, कर्नल इंद्रजीत, विनोद, हंसराज आदि उनके पक्ष में बताए जा रहे थे। कंवर सबसे पहले उनके लिए सीट खाली करने को आए।
पर्यवेक्षकों के सामने समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। पांच में से तीन सांसद उनके विरोध में रहे। केंद्र की ओर से इशारा होने के बाद धूमल खेमा बैकफुट पर आया। मुख्यमंत्री का नाम घोषित होने से एक दिन पहले धूमल को प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी पड़ी कि वे कभी पद की रेस में नहीं थे। नड्डा के नाम पर मुहर नहीं लगना भी धूमल के लिए झटका माना जा रहा है।
हमीरपुर में जनाधार बढ़ाने की चुनौती
चुनाव में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की 17 सीटों से सात में हार पार्टी की बड़ी चिंता है। साढ़े तीन साल में 6 सीटों में जनाधार गिरा है। धूमल और प्रदेश अध्यक्ष सत्ती हारे हैं। सीट पर धूमल के बेटे अनुराग सांसद हैं।
अनुराग से ज्यादा अब यह चुनौती धूमल के सामने रहेगी कि डेढ़ वर्ष में गिरे मतदान प्रतिशत को कैसे बढ़ाया जाए।
समर्थक विधायकों को मंत्रिमंडल में लाना
धूमल की हार के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि धूमल समर्थक विधायकों में से कितनों को जयराम मंत्रिमंडल में जगह मिलती है। सूत्रों की मानें तो उनकी ओर से कुछ नाम सुझाए गए हैं। नरेंद्र बरागटा, विरेंद्र कंवर, सुखराम चौधरी आदि रेस में हैं। अब देखना है कि कौन से विधायक मंत्री पद की शपथ लेते हैं।
सीएम को मेरा पूरा समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि नए मुख्यमंत्री को मेरा पूरा समर्थन होगा। केंद्रीय नेतृत्व ने जो निर्णय लिया है वो उसके साथ हैं।
विधायक दल की बैठक के लिए पहुंचे पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल ने उनके पक्ष में नारेबाजी को लेकर पूर्व सीएम शांता कुमार के अनुशासनहीनता के बयान पर पलटवार किया है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा जिन लोगों ने घरों में पार्टी के झंडे तक नहीं लगाए वो आज अनुशासनहीनता की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो भी फैसला उनके संदर्भ में पार्टी ने लिया है उन्होंने उसे मानकर जी जान से काम किया।