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डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा हो सकता है छात्रवृत्ति घोटाला, मंत्रिमंडल में जाएगा मामला

Thu, 09 Aug 2018 07:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 09 Aug 2018 07:15 AM IST
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himachal cabinet meeting 150 crore scholarship scam case

निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का घोटाला 150 करोड़ से भी ज्यादा का हो सकता है। यह खुलासा शिक्षा विभाग की प्रारंभिक जांच में हुआ है। विभाग का दावा है कि घोटाले के पुख्ता सबूत उसके पास हैं। अब इस मामले को वीरवार को मंत्रिमंडल की बैठक में ले जाया जाएगा। विभाग की सिफारिश पर सरकार इस मामले की जांच अब विजिलेंस ब्यूरो को दे सकती है। 

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सरकार की ओर से हर साल इन विद्यार्थियों के लिए करीब 70 करोड़ की राशि जारी की जाती है। यह गड़बड़झाला पिछले कई वर्ष से चल रहा है। वर्ष 2015-16 में भी तत्कालीन वीरभद्र सरकार ने इस मामले की जांच करवाई थी। उस दौरान कुछ मामलों को पकड़ने के बाद कुछ निजी संस्थानों को जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया।
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जयराम सरकार बनने के बाद इस मामले की शिकायत मंत्री रामलाल मार्कंडा के पास पहुंची। उन्होंने इस मामले को सरकार के समक्ष उठाया, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने नए सिरे से जांच की। विभाग की इसी जांच में 150 करोड़ से ज्यादा घपले की बात सामने आई है। विभाग का दावा है कि घपले की यह राशि इससे भी कहीं अधिक है। लिहाजा, सरकार किसी और एजेंसी से इस मामले की जांच कराए।

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25 से अधिक संस्थानों ने किया घपला, अफसर भी शामिल

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प्रारंभिक जांच में सूबे के 25 से अधिक निजी शिक्षण संस्थानों में गड़बड़झाले के सबूत मिले हैं। बड़ी बात यह है कि अफसरों की मिलीभगत से इतने बड़े घोटाले को ये संस्थान अंजाम दे पाए हैं। जांच में स्पष्ट हो गया है कि कई निजी शिक्षण संस्थानों ने खाली सीटों पर फर्जी दाखिले दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है।

छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपीई पास पोर्टल में कई तरह की खामियां मिली हैं। इन खामियों का लाभ उठाते हुए ही निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी दाखिला दिखाकर विद्यार्थियों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले और सरकारी धनराशि हड़प ली।

शिक्षा विभाग ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच पूरी कर ली है। जांच में 150 करोड़ रुपये के घोटाले के सबूत मिले हैं। लेकिन यह घोटाला इससे भी बड़ा हो सकता है। अब किसी और जांच एजेंसी से पड़ताल कराने के लिए राज्य सरकार से सिफारिश की जा रही है। - डॉ. अरुण कुमार शर्मा, शिक्षा सचिव

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