अहम खबर, कर्मचारियों के लिए कैबिनेट का बड़ा फैसला
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हिमाचल में अब कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं मिलेगा। हिमाचल मंत्रिमंडल ने इस पर रोक लगा दी है। जो कर्मचारी सेवा विस्तार ले भी चुके हैं, उनका सेवाकाल भी 31 मार्च को खत्म हो जाएगा। यह फैसला हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सोमवार को लिया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की यह बैठक सोमवार सुबह विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले हुई।
इसमें प्रदेश के कर्मचारियों के एक साल के सेवा विस्तार पर बहुप्रतीक्षित फैसला ले लिया गया। मंत्रिमंडल ने यह तय किया है कि 31 मार्च के बाद कोई भी अधिकारी और कर्मचारी एक साल का सेवा विस्तार नहीं ले सकेगा। जिन कर्मचारियों को एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया भी जा चुका है, उनका टेन्योर भी 31 मार्च को खत्म माना जाएगा।
पहले सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 59 की थी
चाहे उन्हें सेवा विस्तार दिए केवल एक महीने का ही समय क्यों नहीं हुआ हो। सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में हिमाचल में कर्मचारियों को एक साल के सेवा विस्तार की घोषणा की थी। यानी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 59 साल कर दी थी। सेवा विस्तार के इच्छुक कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति से पहले आवेदन करने की शर्त रखी गई थी।
नेरचौक मेडिकल कॉलेज चलाएगी सरकार- कैबिनेट ने यह फैसला लिया है कि ईएसआई मेडिकल कॉलेज नेरचौक को राज्य सरकार खुद चला सकती है। हालांकि, ऐसा करने के लिए भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के समक्ष कुछ शर्तें रखी गई हैं। अगर ये शर्तें मानी गईं तो ही इस दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। मंत्रिमंडल ने निजी बिल्डरों को काम का कंप्लीशन प्रमाणपत्र तीन साल के बजाय अब पांच साल के बाद देने का भी फैसला लिया।
सेवा विस्तार पर हर माह फूंके सात करोड़
हिमाचल सरकार कर्मचारियों और अधिकारियों के सेवा विस्तार के नाम पर हर महीने तकरीबन सात करोड़ रुपये की रकम खर्च कर रही है। दिलचस्प यह है कि उनके वेतन से अधिक खर्च भत्ते पर किया जा रहा है। साढ़े 14 महीने में सरकार की ओर से 90 विभागों के 1616 कर्मचारियों और अधिकारियों का सेवा विस्तार दिया गया। इनमें से 254 को अधिकारी और कर्मचारी सरकारी आवासों में रह रहे हैं।
नाहन के विधायक राजीव बिंदल और धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह सूचना विधानसभा में दी गई। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से सदन में बताया गया कि कर्मचारियों और अधिकारियों का सेवा विस्तार देना किसी भी सरकार के अधिकार क्षेत्र में होता है। सदन में मुख्यमंत्री की ओर से जवाब दिया गया कि अब 58 साल के बाद किसी का सेवा विस्तार नहीं किया जाएगा।
इतने कर्मचारियों को मिला सेवा विस्तार
विशेष परिस्थिति में ही ऐसा किया जाएगा। इस मुद्दे पर हंगामा भी हुआ। राजीव बिंदल ने कहा कि पहले से ही घाटे में चल रहे निगम और बोर्डों में कैसे सेवा विस्तार दिया गया। भाजपा विधायक ने इसमें भी पिक एंड चूज की पॉलिसी अपनाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। महेंद्र सिंह ने अपने सवाल में कहा कि प्रदेश में 11 लाख से अधिक युवा बेरोजगार हैं ऐसे में इन युवाओं में से रोजगार दिया जाना चाहिए था।
भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरते हुुए कहा कि सेवा विस्तार का मतलब तो यह हुआ कि जो अधीनस्थ अधिकारी हैं वे योग्य नहीं और उन्हें एक्सटेंशन हासिल कर रहे अधिकारियों व कर्मचारियों के मुकाबले कुछ नहीं आता है। प्रदेश सरकार ने सेवा विस्तार नीति के तहत 1616 अधिकारियों और कर्मचारियों को सेवा विस्तार दिया है।
90 निगमों, बोर्डो, समितियों और विभागों में दिए गए इस सेवा विस्तार के कारण सरकार का करोड़ों का खर्च बड़ा है। इन अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने 3 करोड़ 46 लाख 37 हजार 418, भत्तों पर 3 करोड़ 47 लाख 15 हजार 779 रुपये खर्च होते थे। 1616 में से 254 को आवास सुविधा दी गई थी, जबकि 1362 को आवास सुविधा के दायरे से बाहर हैं।