Himachal: विधानसभा शीत सत्र के अंतिम दिन विपक्ष का हंगामा, नारेबाजी के साथ वाकआउट, जानें वजह
विधानसभा के तपोवन में हुए तीन दिवसीय शीत सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विपक्ष ने फिर हंगामा किया। नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के तपोवन में हुए तीन दिवसीय शीत सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को विपक्ष ने फिर हंगामा किया। भाजपा विधायक दल ने सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में बोलने का मौका न देने का मुद्दा उठाया और विधानसभा अध्यक्ष व सत्तारूढ़ दल कांग्रेस पर तानाशाही का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों ने इस पर विरोध जताते हुए नारेबाजी करते हुए सदन से वाकआउट कर दिया। शुक्रवार को सदन की बैठक विपक्ष के विरोधी सुरों से शुरू हुई। कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अनुपस्थिति में विपक्ष का नेतृत्व करते हुए विपिन सिंह परमार ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया।
परमार ने कहा कि वीरवार को राज्यपाल का अभिभाषण हुआ। उससे पहले राज्यपाल को अगवानी करने के दौरान नेता प्रतिपक्ष को आमंत्रण नहीं दिया गया। इसके अलावा विधानसभा सत्र के पहले दिन दर्शक दीर्घा में जिस तरह से अनुशासन भंग करते हुए तालियां बजीं और कांग्रेस के एक नेता अधिकारियों की गैलरी में बैठ गए, वह नियमों के विरुद्ध था। भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे सदन की गरिमा बनी रहे। इस पर स्पीकर कुलदीप पठानिया ने कहा कि इस बारे में राष्ट्रपति कार्यालय और राजभवन से प्रोटोकॉल तय किया गया है। उसमें स्पीकर, सीएम की तरह नेता प्रतिपक्ष को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भविष्य में इन बातों को देखा जाएगा।
इसके बाद सदन में हंगामा उस वक्त हुआ जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए स्पीकर ने भोरंज के कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार को अंतिम वक्ता बताया। इस पर विपक्ष ने भाजपा विधायक दल के सदस्यों को चर्चा में भाग लेने का मौका न देने का आरोप लगाया। स्पीकर ने किस सदस्य को बोलना है, इस पर अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करने की बात की, जिस पर भाजपा विधायक दल ने विरोध जताया। नोकझोंक के बीच हंगामा बढ़ता ही गया।
बीच में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी विपक्ष के विधायकों से आखिरी दिन सदन की कार्यवाही में सहयोग करने का अनुरोध किया। इसके बाद स्पीकर पठानिया ने सदस्यों को चर्चा की अनुमति देने पर निर्णय लेने के अपने विशेषाधिकार की बात को दोहराया। इससे विपक्ष फिर उखड़ गया और नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चला गया। इसके बाद सदन के नेता की भूमिका में उप मुख्यमंत्री अग्निहोत्री ने चर्चा का समापन भाषण दिया। उन्होंने सदन की कार्यवाही में सहयोग ने करने पर विपक्ष की निंदा की।
सीएम और विपक्ष के नेता अंतिम दिन सदन में नहीं आए
सत्र के अंतिम दिन सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर दोनों ही मौजूद नहीं थे। मंत्रिमंडल गठन पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री दिल्ली में थे, जबकि जयराम ठाकुर के ससुर का देहांत होने के कारण वह मौजूद नहीं हो पाए।
विस अध्यक्ष कर रहे नियमों का उल्लंघन, बजट सत्र में विपक्ष मांगेगा जवाब : विपिन
विधानसभा शीत सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में बोलने का अवसर न देने पर विपक्ष ने नारेबाजी के साथ सदन से वाकआउट किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के सदन में न होने पर प्रतिपक्ष का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि विस अध्यक्ष चैंबर में सुबह तय हुआ था कि धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के चार-चार लोग बोलेंगे। प्रतिपक्ष ने इन नियमों की पालना की, जबकि सत्तापक्ष के आला नेताओं ने प्रस्ताव पर बोलने के लिए पर्चियां विस अध्यक्ष तक पहुंचा दीं।
जब विपक्ष ने इस व्यवस्था पर प्रश्न उठाया तो विस अध्यक्ष विशेषाधिकार की बात करने लगे। आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष बार-बार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। यह संस्थाएं और विधानसभा परंपराएं किताबों से चलती हैं। स्पीकर इनका निर्वहन ढंग से करें। बजट सत्र में विपक्ष के सदस्य उनसे जवाब मांगेंगे। परमार ने बताया कि सदन के तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा की जानी थी, लेकिन छह पन्नों के अभिभाषण में जनता से किए वादों का कोई रोडमैप नहीं था। औपचारिकता के तौर पर बेबसी में राज्यपाल को अभिभाषण को पढ़ना पड़ा।
अपने बोझ तले दब जाएगी बिखरी सरकार
परमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जनादेश की धज्जियां उड़ाई हैं। 25 दिन बाद भी मंत्रिमंडल नहीं बन पाया है। राज्यपाल के अभिभाषण से पहले ही सत्तापक्ष के सदस्य सदन से चले गए। कांग्रेस ने 25 दिन के कार्यकाल में संस्थानों को बंद कर जनता पर तानाशाही का चाबुक चलाया है। बिखरी (खज्जल) सरकार अपने बोझ तले ही दब जाएगी।