पांच दिन में करोड़ों खर्च, हासिल हुआ सिर्फ हंगामा और शोर-शराबा
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हिमाचल विधानसभा के पांच दिवसीय शीतकालीन सत्र के लिए शिमला से धर्मशाला तमाम तामझाम लाने और ले जाने में सरकार ने पब्लिक के कई करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन हासिल हुआ... सिर्फ हंगामा और शोर-शराबा।
पांच दिन में महज सवा 11 घंटे चली सदन की कार्यवाही में न तो जनता के सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसे मुद्दों पर लगे सैकड़ों सवालों को पूछा जा सका और न ही इन पर मंत्रियों के मौखिक जवाब आ पाए।
सदन में लोगों के मुद्दों पर चर्चा के बजाय व्यक्तिगत आक्षेप ही ज्यादा होते रहे। कुल मिला कर न तो विपक्ष सकारात्मक भूमिका निभा पाया, और न ही सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष को नियंत्रित कर सका। सदन चलाने में किसी की दिलचस्पी नहीं दिखी। सत्र के अंतिम दिन पांच विधेयक बगैर चर्चा के पारित हो गए।
सदन तक पहुंचा वीरभद्र-धूमल का घमासान
19 दिसंबर को शीत सत्र के पहले दिन दोपहर दो बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही में एक घंटे तक केवल भोरंज के पूर्व विधायक आईडी धीमान को शोकोद्गार प्रस्ताव पर चर्चा कर श्रद्धांजलि दी गई। सदन के भीतर दिग्गज नेताओं वीरभद्र-धूमल के हाथ बेशक मिले, मगर बाहर निकलते ही एक-दूसरे पर जुबानी हमले शुरू हो गए।
वीरभद्र-धूमल का घमासान सदन के भीतर तक पहुंच गया। विपक्ष वीरभद्र के खिलाफ आयकर मामले में अदालती फैसले पर चर्चा को अड़ा रहा और प्रश्नकाल नहीं हो पाया। सदन की कार्यवाही महज सवा घंटे चली। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल को एक बार सदन की कार्यवाही 15 मिनट और दूसरी बार गतिरोध न टूटने पर अगले दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
करीब दो घंटे चले सदन में नोटबंदी और अन्य मामलों का दूसरे दिन का बिजनेस रिपीट करने के आरोप में विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्ष ने चेयर का घेराव किया और भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज तो स्पीकर की कुर्सी पर ही बैठ गए। सत्ता पक्ष ने इस पर अवमानना का प्रस्ताव पारित कर भाजपा के तीन विधायकों को शीत सत्र से निलंबित किया।
आखिरी दिन भी खत्म नहीं हुआ गतिरोध
प्राइवेट मेंबर्स डे पर सदन की कार्यवाही करीब सवा पांच घंटे चली। विपक्ष ने विधायकों के निलंबन के मसले पर वाकआउट किया। तीनों निलंबित विधायकों ने विधानसभा के मुख्य गेट के सामने धरना दिया। सदन शुरू होने से पहले भी विपक्षी विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में जमकर नारेबाजी की।
सत्र के आखिरी दिन भी सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष में गतिरोध खत्म नहीं हो सका। विपक्ष निलंबित विधायकों की बहाली करने पर अड़ा रहा। इसी बीच सदन में खूब शोर-शराबा रहा। निलंबन पर विपक्ष ने वाकआउट भी किया। सदन केवल दो घंटे ही चला। हालांकि, विपक्ष ने शीत सत्र में पहली बार अंतिम बैठक में 11:00 बजे प्रश्नकाल में हिस्सा लिया।
तो फिर पांच दिन में काम क्या हुआ
सदन में रखे 368 सवालों में से ज्यादातर के जवाब लिखित ही दिए गए। प्रश्नकाल के बाधित होने पर अधिकांश सवालों को सदन के पटल पर रखा ही नहीं जा सका। मंत्रियों की ओर से करीब ढाई दर्जन सवालों के जवाब ही मौखिक रूप से दिए गए। कई मंत्रियों का तो जवाब देने का नंबर ही नहीं आया।
सत्र के स्थगन के से पहले विधानसभा अध्यक्ष बीबीएल बुटेल ने बताया कि सरकारी विभागों की ओर से इस मौके पर सारे प्रश्नों के जवाब ऑनलाइन उपलब्ध करवाए गए। उत्तर की एक भी हार्ड कॉपी तक नहीं ली गई। नियम 101 के तहत दो गैर सरकारी संकल्प प्रस्तुत किए गए। इनमें से एक संकल्प पर चर्चा हुई।
दूसरे को सदन पटल पर ही रखा गया। 248 तारांकित और 120 अतारांकित प्रश्नों पर जवाब उपलब्ध करवाए गए। पांच सरकारी विधेयकों को पारित किया गया। नियम 324 में तीन विषयों को सदन में उठाया गया। समितियों के 24 प्रतिवेदन भी सभा पटल पर रखे गए। नियम 130 में प्रस्ताव पर भी सुझाव आए।